बंगाल में खिला कमल: बीजेपी की प्रचंड जीत के पीछे RSS की ‘मूक क्रांति’, ऐसे ढहा ममता बनर्जी का किला
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने भारतीय राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। टीएमसी के गढ़ में बीजेपी की इस ऐतिहासिक जीत के पीछे की ‘मूक क्रांति’ पर आधारित न्यूज़ रिपोर्ट यहाँ दी गई है:
बंगाल में खिला कमल: बीजेपी की प्रचंड जीत के पीछे RSS की ‘मूक क्रांति’, ऐसे ढहा ममता बनर्जी का किला
बड़ा खुलासा: 2 लाख बैठकें और बूथ स्तर पर गुप्त रणनीति; हिंसा के बावजूद पीछे नहीं हटे संघ के स्वयंसेवक
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। 293 सीटों वाली विधानसभा में बीजेपी ने न केवल बहुमत का आंकड़ा पार किया है, बल्कि वह 200 से अधिक सीटें (160 जीत + 48 पर बढ़त) हासिल कर एकतरफा जीत की ओर बढ़ रही है। बीजेपी की इस अप्रत्याशित सफलता के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की वह ‘मूक क्रांति’ सामने आई है, जिसने पर्दे के पीछे रहकर पूरा चुनावी गणित ही बदल दिया।
RSS की ‘सीक्रेट’ रणनीति: शोर कम, काम ज्यादा
जहाँ एक ओर टीएमसी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आक्रामक प्रचार सुर्खियों में रहा, वहीं आरएसएस के स्वयंसेवकों ने बेहद शांत रहकर जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाला। संघ ने चुनावी शोर से दूर रहकर निम्नलिखित बिंदुओं पर काम किया:
2 लाख छोटी बैठकें: स्वयंसेवकों ने राज्य के कोने-कोने में लोगों के छोटे समूहों के साथ करीब 2 लाख बैठकें कीं।
मतदाता जागरूकता: लोगों को निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया और उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया।
फीडबैक तंत्र: संघ ने “जनता के मिजाज” और “विरोधियों की चाल” की सटीक जानकारी बीजेपी नेतृत्व तक पहुंचाई, जिससे पार्टी को अपनी रणनीति सटीक बनाने में मदद मिली।
2021 की हिंसा के बाद भी नहीं टूटी हिम्मत
2021 के विधानसभा चुनावों के बाद बंगाल में हुई राजनीतिक हिंसा ने बीजेपी और संघ कार्यकर्ताओं को गहरे जख्म दिए थे। संघ के सूत्रों के अनुसार, कई कार्यकर्ताओं की हत्या और घरों को जलाए जाने के बावजूद आरएसएस पीछे नहीं हटा। स्वयंसेवकों ने हिंसा पीड़ितों को कानूनी सहायता, मुआवजा और उनके घरों के पुनर्निर्माण में मदद कर जनता के बीच अटूट भरोसा कायम किया।
बीजेपी नेता का स्वीकारोक्ति: “बेहतरीन रहा समन्वय”
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय संघ की मेहनत को देते हुए कहा, “आरएसएस कार्यकर्ताओं ने दिन-रात एक कर दिया। बूथ स्तर पर जो मेहनत हुई और पार्टी व संघ के बीच जो समन्वय (Coordination) रहा, उसी का नतीजा आज सबके सामने है।”
2021 से ही शुरू हो गई थी 2026 की तैयारी
बीजेपी और आरएसएस ने 2021 के नतीजों (77 सीटें) को हार के रूप में नहीं, बल्कि एक नींव के रूप में देखा। पिछले 5 वर्षों में संघ ने अपने जनाधार का विस्तार किया और उन बूथों पर भी अपनी पकड़ मजबूत की, जहाँ टीएमसी को अजेय माना जाता था।
निष्कर्ष: बंगाल के नतीजों ने साबित कर दिया है कि चुनावी रैलियों और भाषणों के साथ-साथ बूथ स्तर पर की गई ‘मूक मेहनत’ कितनी प्रभावी हो सकती है। आरएसएस की इस रणनीति ने न केवल बीजेपी को सत्ता की दहलीज पार कराई, बल्कि बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत भी कर दी है।
