महिला आरक्षण पर विधानसभा कूच: पुलिस के साथ तीखी झड़प, कांग्रेस जिलाध्यक्ष बेहोश, कई कार्यकर्ता हिरासत में
महिला आरक्षण पर विधानसभा कूच: पुलिस के साथ तीखी झड़प, कांग्रेस जिलाध्यक्ष बेहोश, कई कार्यकर्ता हिरासत में
विशेष संवाददाता, देहरादून उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र के पहले दिन राजधानी देहरादून की सड़कें सियासी संग्राम की गवाह बनीं। 33% महिला आरक्षण को अविलंब लागू करने की मांग को लेकर महिला कांग्रेस ने विधानसभा कूच किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई भारी धक्का-मुक्की में कांग्रेस की एक महिला पदाधिकारी बेहोश हो गईं, जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
रिस्पना पुल पर सियासी संग्राम
मंगलवार सुबह करीब 11 बजे कांग्रेस कार्यकर्ता हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में एकत्रित हुए। दोपहर को महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला और चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाओं ने विधानसभा की ओर मार्च शुरू किया।
बैरिकेडिंग पर हंगामा: पुलिस ने सुरक्षा के मद्देनजर रिस्पना पुल के पास भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी। जैसे ही प्रदर्शनकारी वहां पहुंचे, पुलिस ने उन्हें रोक दिया।
अधिकारी हुई बेहोश: पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की के दौरान महिला कांग्रेस की जिला अध्यक्ष अंशुल त्यागी अचानक बेहोश हो गईं। उन्हें तत्काल एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया।
हरक सिंह रावत का वार: ‘आरक्षण के नाम पर नौटंकी कर रही सरकार’
प्रदर्शन में शामिल पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने धामी सरकार और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला।
वीआईपी संस्कृति पर सवाल: हरक ने कहा कि एक तरफ सरकार महिला सुरक्षा की बात करती है, तो दूसरी तरफ अपराधों पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन लोगों की तस्वीरें दिखती हैं जो विवादों में रहे हैं।
परिसीमन का पेंच: उन्होंने केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि जब 2023 में बिल पारित हो गया था, तो जनगणना और परिसीमन के नाम पर इसे लटकाना महिलाओं के साथ धोखा है। उन्होंने राज्य के विशेष सत्र को “सियासी नौटंकी” करार दिया।
’संघीय ढांचे को पहुंचाया नुकसान’
महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार महिला आरक्षण के नाम पर देश की महिलाओं को गुमराह कर रही है और केंद्र की नीतियों ने संघीय ढांचे को तहस-नहस कर दिया है।
पुलिस की कार्रवाई
काफी देर तक चले हंगामे और बैरिकेडिंग तोड़ने के प्रयास के बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए ज्योति रौतेला सहित दर्जनों महिला कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को हिरासत में ले लिया। सभी प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर पुलिस लाइन भेज दिया गया।
मुख्य बिंदु: कांग्रेस की मांग है कि आरक्षण को जनगणना या परिसीमन की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल आगामी चुनावों से ही लागू किया जाए।
