”राहुल से नहीं चलेगी पार्टी, प्रियंका ही असली इंदिरा”: तेज प्रताप यादव का कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा हमला
बिहार की राजनीति के कद्दावर चेहरे और जनशक्ति जनता दल के संस्थापक तेज प्रताप यादव के एक ताजा बयान ने कांग्रेस और बिहार की सियासत में खलबली मचा दी है। तेज प्रताप ने राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता को सिरे से खारिज करते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा को कांग्रेस की एकमात्र उम्मीद बताया है।
”राहुल से नहीं चलेगी पार्टी, प्रियंका ही असली इंदिरा”: तेज प्रताप यादव का कांग्रेस नेतृत्व पर सीधा हमला
पटना (अप्रैल 2026): बिहार में जारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। पटना में पत्रकारों से चर्चा के दौरान उन्होंने राहुल गांधी की कार्यशैली की आलोचना की और प्रियंका गांधी को पार्टी की कमान सौंपने की वकालत की।
”बुलेट पर बैठने से पार्टी नहीं चलती”
तेज प्रताप यादव ने राहुल गांधी की हालिया गतिविधियों और यात्राओं पर तंज कसते हुए कहा:
”कांग्रेस को सिर्फ प्रियंका गांधी ही चला सकती हैं, उनमें अपनी दादी इंदिरा गांधी की छवि दिखती है। राहुल गांधी से पार्टी चलने वाली नहीं है। सिर्फ यात्रा करने या बुलेट पर बैठने से राजनीति नहीं होती। राहुल गांधी का आखिर मकसद क्या है? बिहार में नीतीश कुमार अलग हो गए, मुख्यमंत्री बदल गया, लेकिन राहुल गांधी सिर्फ बातें करते रह गए।”
नीतीश कुमार पर राहुल के बयान का पलटवार
तेज प्रताप की यह तीखी प्रतिक्रिया राहुल गांधी के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने जद(यू) प्रमुख नीतीश कुमार को ‘समझौता किया हुआ नेता’ कहा था। बता दें कि हाल ही में बिहार की राजनीति में बड़ा फेरबदल हुआ है, जहाँ नीतीश कुमार के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद भाजपा के सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है।
कांग्रेस के भीतर भी सुलग रही है असंतोष की आग
तेज प्रताप अकेले नहीं हैं जो राहुल गांधी के नेतृत्व पर सवाल उठा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी के पूर्व वरिष्ठ नेताओं ने भी हाल के दिनों में ऐसे ही आरोप लगाए हैं:
शकील अहमद का आरोप: पूर्व केंद्रीय मंत्री शकील अहमद ने दावा किया था कि कांग्रेस में आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है। उनके अनुसार, राहुल गांधी केवल उन लोगों के साथ सहज रहते हैं जो उन्हें अपना ‘बॉस’ मानते हैं।
वरिष्ठों की अनदेखी: अहमद ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी अपनी पारिवारिक विरासत के अहंकार में वरिष्ठ नेताओं को हाशिये पर धकेल रहे हैं और संगठन में केवल अपने करीबियों को जगह दे रहे हैं।
क्या प्रियंका गांधी बनेंगी विकल्प?
तेज प्रताप यादव का यह बयान उस समय आया है जब कांग्रेस के भीतर और बाहर प्रियंका गांधी को मुख्य भूमिका में लाने की मांग जोर पकड़ रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी की भाषण शैली और लोगों से जुड़ने का तरीका कार्यकर्ताओं में अधिक जोश भरता है।
निष्कर्ष: विपक्षी दलों के नेताओं द्वारा कांग्रेस के आंतरिक नेतृत्व पर टिप्पणी करना यह दर्शाता है कि ‘इंडिया’ गठबंधन या भविष्य की चुनावी रणनीतियों में राहुल गांधी की स्वीकार्यता को लेकर अब भी संशय बरकरार है। क्या कांग्रेस इन बाहरी मशवरों पर ध्यान देगी या राहुल के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
एक सवाल आपके लिए: क्या आपको लगता है कि प्रियंका गांधी के नेतृत्व संभालने से कांग्रेस की चुनावी किस्मत बदल सकती है, या समस्या नेतृत्व से कहीं गहरी है?
