हल्द्वानी में भी ‘नोएडा’ जैसी चिंगारी: मजदूरों के आंदोलन में हंगामा; पुलिस पर लगा मारपीट और गला दबाने का आरोप, तनाव बढ़ा
नोएडा की आग अब उत्तराखंड के हल्द्वानी तक पहुँच गई है। नैनीताल जिले के औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। पुलिस के साथ हुई कथित झड़प ने इस आंदोलन को और भी संवेदनशील बना दिया है।
यहाँ इस घटनाक्रम पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
हल्द्वानी में भी ‘नोएडा’ जैसी चिंगारी: मजदूरों के आंदोलन में हंगामा; पुलिस पर लगा मारपीट और गला दबाने का आरोप, तनाव बढ़ा
हल्द्वानी: नोएडा में हुए श्रमिक विद्रोह की धमक अब नैनीताल जिले के हल्द्वानी में भी सुनाई देने लगी है। यहाँ एक कंपनी के सैकड़ों कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि और कार्य परिस्थितियों में सुधार की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया। हालांकि, मामला उस समय और बिगड़ गया जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर अभद्रता और हिंसा करने के गंभीर आरोप लगाए।
मजदूरों की प्रमुख मांगें
हल्द्वानी के श्रमिक मुख्य रूप से तीन मांगों को लेकर अड़े हुए हैं:
न्यूनतम वेतन: ₹20,000 प्रति माह।
काम के घंटे: 8 घंटे की फिक्स शिफ्ट।
ब्रेक सिस्टम: ‘नो ब्रेक’ सिस्टम को तत्काल खत्म करना।
पुलिस पर गंभीर आरोप: “गला पकड़कर की मारपीट”
आंदोलन के दौरान उस समय अफरातफरी मच गई जब सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी ने पुलिस पर सीधे हमले का आरोप लगाया। पीयूष जोशी का दावा है कि:
उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस ने हस्तक्षेप कर इसे दबाने की कोशिश की।
एक पुलिस अधिकारी ने कथित तौर पर उनका गला पकड़कर मारपीट की और उन्हें धमकाया।
उन्होंने इसे शक्तिशाली लोगों के दबाव में किया गया दमन बताया और इसे अपने ‘नशा-विरोधी अभियान’ से जोड़ते हुए खुद को निशाना बनाने की बात कही।
प्रशासन का पक्ष: शांति बनाए रखने की अपील
दूसरी ओर, प्रशासन और पुलिस विभाग स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश कर रहे हैं। एसपी सिटी मनोज कत्याल ने कहा:
”मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर धरना दिया था, जो फिलहाल शांतिपूर्ण है। मजदूर प्रतिनिधियों और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच वार्ता चल रही है। बातचीत का जो भी नतीजा होगा, उससे श्रमिकों को अवगत करा दिया जाएगा। एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।”
आगे की रणनीति: आमरण अनशन की चेतावनी
पुलिस की कथित सख्ती के बाद मजदूरों और स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला और उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे इस आंदोलन को और उग्र करेंगे। उन्होंने आमरण अनशन पर बैठने की भी धमकी दी है।
मौजूदा स्थिति: हल्द्वानी के औद्योगिक क्षेत्र में माहौल अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है। सुरक्षा की दृष्टि से पीएसी और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि नोएडा जैसी हिंसा की पुनरावृत्ति न हो।
क्या आपको लगता है कि पुलिस की सख्ती जायज मांगों को दबाने का प्रयास है, या यह केवल व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई कार्रवाई?
