उत्तराखंड में फिर गरजा धामी सरकार का ‘बुलडोजर’: अतिक्रमण के खिलाफ महाअभियान शुरू, 580 अवैध निर्माण ध्वस्त; वक्फ संपत्तियां भी जांच के घेरे में
उत्तराखंड में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। कुमाऊं से शुरू हुआ यह ‘बुलडोजर अभियान’ अब पूरे प्रदेश में विस्तार ले रहा है।
उत्तराखंड में फिर गरजा धामी सरकार का ‘बुलडोजर’: अतिक्रमण के खिलाफ महाअभियान शुरू, 580 अवैध निर्माण ध्वस्त; वक्फ संपत्तियां भी जांच के घेरे में
देहरादून/ऊधम सिंह नगर: उत्तराखंड सरकार ने सरकारी जमीनों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए अपना ‘एक्शन मोड’ फिर से सक्रिय कर दिया है। शासन-प्रशासन ने चरणबद्ध तरीके से अवैध निर्माणों पर कार्रवाई तेज कर दी है। इस अभियान का ताजा केंद्र ऊधम सिंह नगर जिला बना है, जहाँ से राज्यव्यापी कार्यवाही की नई शुरुआत की गई है।
अब तक की कार्रवाई: 580 ढांचे जमींदोज
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस ताजा अभियान के तहत अब तक 580 अवैध संरचनाओं को हटाया जा चुका है।
धार्मिक स्थल: इनमें बिना अनुमति सरकारी भूमि पर बनाए गए छोटे मंदिर, मजारें, मस्जिद और गुरुद्वारों की दीवारें शामिल हैं।
अदालती मामले: लगभग 200 ऐसे मामले भी चिन्हित हैं जो वर्तमान में कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं। कोर्ट से हरी झंडी मिलते ही इन पर भी बुलडोजर चलना तय है।
तराई क्षेत्रों पर विशेष फोकस
प्रशासन का सबसे ज्यादा ध्यान देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर और नैनीताल जैसे तराई जिलों पर है।
ऊधम सिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने बताया कि जिले में सूचना तीन अवैध निर्माणों की थी, लेकिन मौके पर सात अतिक्रमण मिले, जिन्हें तुरंत ध्वस्त कर दिया गया।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई जारी रहेगी।
वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की गहन जांच
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू उन जमीनों की जांच है जो वक्फ बोर्ड के नाम पर दर्ज हैं।
विवाद: सरकारी डेटा के अनुसार, 100 से अधिक ऐसी संरचनाएं हैं जो सरकारी भूमि पर वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज की गई हैं। इनमें से 30 अकेले देहरादून में हैं।
सीएम का रुख: मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट कहा है कि, “हम कोई स्थान देखकर नहीं, बल्कि अतिक्रमण देखकर कार्रवाई कर रहे हैं। नियमों के विरुद्ध बना हर ढांचा हटाया जाएगा।”
अधिकारियों का पक्ष: “सतत प्रक्रिया है अभियान”
नोडल अधिकारी पराग धकाते के अनुसार, यह कोई एक बार की कार्रवाई नहीं बल्कि एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। प्रशासन का लक्ष्य सरकारी संपत्तियों को सुरक्षित करना है। वहीं, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने भी कहा कि सरकार कोर्ट के आदेशों का पालन कर रही है और कानून की सख्ती के साथ सामाजिक संतुलन का भी ध्यान रखा जा रहा है।
विपक्ष के सवाल और सरकार की पारदर्शिता
जहाँ एक ओर बीजेपी इसे ‘कानून का राज’ स्थापित करने वाला कदम बता रही है, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस इसे ‘चुनिंदा कार्रवाई’ करार देकर सवाल उठा रही है। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और केवल उन्हीं ढांचों को छुआ जा रहा है जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं।
निष्कर्ष: धामी सरकार के इस सख्त रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड में अतिक्रमण की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है। 200 से अधिक चिन्हित मामलों पर जैसे-जैसे कोर्ट की अनुमति मिलेगी, बुलडोजर की रफ्तार और तेज होगी।
