अन्तर्राष्ट्रीय

​ईरान में ‘अघोषित तख्तापलट’! IRGC ने सत्ता पर किया कब्जा, विदेश मंत्री को किनारे कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लिया कड़ा फैसला

मध्य पूर्व से इस वक्त की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आ रही है। ईरान में एक बड़े ‘तख्तापलट’ जैसी स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ निर्वाचित सरकार और कूटनीतिक धड़े को दरकिनार कर कट्टरपंथी सेना ने सत्ता की बागडोर अपने हाथों में ले ली है।

​इस वैश्विक भू-राजनीतिक बदलाव पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट:

​ईरान में ‘अघोषित तख्तापलट’! IRGC ने सत्ता पर किया कब्जा, विदेश मंत्री को किनारे कर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लिया कड़ा फैसला

​तेहरान/वॉशिंगटन: ईरान की सत्ता संरचना में एक बड़ा और खतरनाक बदलाव देखने को मिला है। ‘द न्यूयॉर्क पोस्ट’ और ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ की ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की कट्टरपंथी सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने देश के सैन्य और कूटनीतिक फैसलों पर पूरी तरह कब्जा कर लिया है। अब ईरान की विदेश नीति और युद्ध से जुड़े फैसले चुनी हुई सरकार के बजाय सीधे IRGC कमांडर अहमद वाहिदी और सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई के हाथों में आ गए हैं।

​लिबरल नेताओं की छुट्टी, फैसलों को पलटा

​रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में IRGC ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित कई उदारवादी (Liberal) नेताओं को प्रभावी रूप से किनारे कर दिया है।

​होर्मुज पर विवाद: विदेश मंत्री अराघची ने हाल ही में ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत के बाद व्यापार के लिए ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खोलने का संकेत दिया था।

​सेना का हस्तक्षेप: IRGC ने इस फैसले को तुरंत पलट दिया और आदेश दिया कि अमेरिकी दबाव के जवाब में यह समुद्री रास्ता बंद ही रहना चाहिए।

​कूटनीतिक टीम वापस बुलाई गई: बातचीत की उम्मीदें धूमिल

​ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ के सचिव मोहम्मद बाघर ज़ोलघाद्र का प्रभाव अब कूटनीतिक वार्ताओं तक फैल गया है।

​आंतरिक मतभेद: बताया जा रहा है कि अराघची द्वारा अमेरिका के प्रति नरम रुख और ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ (प्रतिरोध की धुरी) के मुद्दे पर लचीलापन दिखाने से IRGC नाराज थी।

​कदम: इसके परिणामस्वरूप ईरान की वार्ता टीम को तेहरान वापस बुला लिया गया है, जिससे पश्चिमी देशों के साथ परमाणु या व्यापारिक समझौते की संभावनाएं लगभग खत्म हो गई हैं।

​स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्ध जैसे हालात

​IRGC ने फारस की खाड़ी में अपनी ताकत और आक्रामकता बढ़ा दी है।

​जहाजों पर हमला: होर्मुज में तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब ईरानी सेना ने वहां से गुजरने वाले जहाजों पर हमले शुरू किए। इसमें दो भारतीय जहाजों पर भी फायरिंग की खबर है।

​अमेरिका का एक्शन: जवाब में अमेरिका ने ईरान के एक कार्गो शिप को अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में किसी भी वक्त बड़े युद्ध भड़कने की आशंका पैदा हो गई है।

​विश्लेषकों की चेतावनी: अब आगे क्या?

​भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अहमद वाहिदी और मुज्तबा खामेनेई का उभरना इस बात का संकेत है कि ईरान अब बातचीत के रास्ते बंद कर रहा है। वॉशिंगटन का यह दावा भी गलत साबित होता दिख रहा है कि हाल के संघर्षों में बड़े जनरलों के मारे जाने के बाद ईरान नेतृत्व कमजोर या नरम पड़ा है। इसके विपरीत, IRGC अब और अधिक आक्रामक होकर उभरी है।

​वैश्विक प्रभाव: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। इसकी नाकेबंदी से वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ सकता है और भारत सहित कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।

​क्या आपको लगता है कि ईरान में सेना का यह कब्जा मध्य पूर्व को एक महायुद्ध (World War) की ओर धकेल रहा है?

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