रामपुर कोर्ट से आजम खान को बड़ा झटका: दो पैन कार्ड मामले में सजा बरकरार, सेशन कोर्ट ने खारिज की अपील
उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान और उनके परिवार के लिए मुश्किलों भरा दिन रहा। दो पैन कार्ड मामले में सजा के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर कोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।
रामपुर कोर्ट से आजम खान को बड़ा झटका: दो पैन कार्ड मामले में सजा बरकरार, सेशन कोर्ट ने खारिज की अपील
रामपुर: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रामपुर की सेशन कोर्ट ने 20 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए, दो अलग-अलग पैन कार्ड रखने के मामले में मिली सजा के खिलाफ दायर की गई उनकी अपील को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
सेशन कोर्ट का फैसला: सजा रहेगी बरकरार
जानकारी के अनुसार, रामपुर की सेशन कोर्ट में इस मामले को लेकर दोनों पक्षों की दलीलें काफी समय से चल रही थीं। सोमवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए आजम खान और अब्दुल्ला आजम की अपील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले का सीधा अर्थ यह है कि निचली अदालत द्वारा दी गई 7-7 साल के कारावास की सजा अब बरकरार रहेगी।
क्या था मामला? (Case Background)
आरोप: यह मामला साल 2019 का है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम खान के पास दो अलग-अलग जन्मतिथि वाले पैन कार्ड थे और आजम खान ने इस साजिश में अपने बेटे की मदद की थी।
निचली अदालत का फैसला: नवंबर 2025 में रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) ने पिता-पुत्र को जालसाजी और धोखाधड़ी का दोषी पाया था। कोर्ट ने दोनों को सात-सात साल जेल की सजा और भारी जुर्माने का आदेश दिया था।
सरकारी वकील का बयान
इस मामले में ADGC सीमा राणा ने बताया कि कोर्ट ने आजम खान पक्ष की अपील को आधारहीन मानते हुए खारिज कर दिया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार (स्टेट) की तरफ से अभियुक्तों की सजा को और बढ़ाने के लिए जो अपील दायर की गई है, उस पर सुनवाई की अगली तारीख जल्द ही तय की जाएगी।
अब क्या है आजम खान के पास विकल्प?
आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम फिलहाल रामपुर जेल में बंद हैं। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सेशन कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद अब उनके पास इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने का विकल्प बचा है। उनके वकील अब हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में हलचल: इस फैसले के बाद समाजवादी पार्टी के खेमे में मायूसी है, जबकि विरोधी दल इसे न्याय की जीत बता रहे हैं। आजम खान पर चल रहे कई अन्य मुकदमों के बीच इस सजा का बरकरार रहना उनकी राजनीतिक पारी के लिए एक बड़ा संकट माना जा रहा है।
क्या आपको लगता है कि आजम खान की कानूनी लड़ाई अब और भी लंबी होने वाली है?
