अन्तर्राष्ट्रीय

​मिड-एयर किलिंग की साजिश! पाकिस्तानी वायुसेना ने 24 लड़ाकू विमानों के साये में ईरानी नेताओं को पहुँचाया तेहरान

इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद एक बेहद नाटकीय घटनाक्रम सामने आया है। ईरानी डेलिगेशन को सुरक्षित घर पहुँचाने के लिए पाकिस्तान को अपनी वायुसेना की पूरी ताकत झोंकनी पड़ी।

​यहाँ इस तनावपूर्ण मिशन की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

​मिड-एयर किलिंग की साजिश! पाकिस्तानी वायुसेना ने 24 लड़ाकू विमानों के साये में ईरानी नेताओं को पहुँचाया तेहरान

​इस्लामाबाद | 18 अप्रैल, 2026

​पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उच्च स्तरीय शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के खत्म होने के बाद, आसमान में एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन देखने को मिला। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली हमले के डर से सहमे ईरानी प्रतिनिधिमंडल को पाकिस्तानी वायुसेना (PAF) ने अभूतपूर्व सुरक्षा घेरे में तेहरान तक पहुँचाया।

​1. 24 लड़ाकू विमानों का ‘सुरक्षा कवच’

​जब वार्ता विफल हुई, तो ईरानी प्रतिनिधियों को अंदेशा हुआ कि उनके विमान को बीच रास्ते में निशाना बनाया जा सकता है। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पाकिस्तान ने अपने बेड़े के सबसे आधुनिक J-10C फाइटर जेट्स को तैनात किया। करीब दो दर्जन (24) लड़ाकू विमानों ने ईरानी डेलिगेशन के विमान को चारों तरफ से घेर लिया ताकि किसी भी मिसाइल हमले को नाकाम किया जा सके।

​2. AWACS की निगरानी में ‘मैसिव मिशन’

​यह केवल लड़ाकू विमानों का एस्कॉर्ट नहीं था, बल्कि एक पूर्ण सैन्य ऑपरेशन था।

​हवाई निगरानी: पाकिस्तान ने हवा में उड़ते रडार यानी AWACS (एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) को भी सक्रिय रखा, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर से आने वाले किसी भी दुश्मन विमान या मिसाइल की पहचान कर सकता था।

​पाकिस्तानी रुख: सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने इसे अपनी ‘जिम्मेदारी’ बताया। अधिकारियों का कहना था कि मेहमानों की सुरक्षा उनके क्षेत्र और सीमा तक उनकी प्राथमिकता थी।

​3. इजरायल की ‘स्ट्राइक लिस्ट’ में बड़े नाम

​रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल के निशाने पर ईरान के दो सबसे प्रभावशाली नेता थे:

​अब्बास अराघची: ईरान के विदेश मंत्री।

​मोहम्मद बागेर गालिबाफ: ईरानी संसद के अध्यक्ष।

​4. जान बचाने के लिए ‘चकमा’ और मशहद में लैंडिंग

​ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य प्रोफेसर मोहम्मद मरंडी ने दावा किया कि उनके विमान को मिसाइल से मार गिराने की पुख्ता साजिश रची गई थी। इस खतरे को भांपते हुए ईरानियों ने अंतिम समय पर कई बदलाव किए:

​विमान बदला: उन्होंने सुरक्षा कारणों से अपना तय विमान बदला।

​रास्ता बदला: वे सीधे तेहरान जाने के बजाय उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में उतरे।

​सड़क यात्रा: मशहद पहुंचने के बाद नेताओं ने हवाई यात्रा छोड़ दी और बस-ट्रेन के जरिए गुप्त तरीके से अपनी जान बचाते हुए आगे का सफर तय किया।

​5. वार्ता विफलता के बाद बढ़ा तनाव

​विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामाबाद वार्ता का बेनतीजा रहना इस बात का संकेत है कि मध्य-पूर्व (Middle East) में तनाव अभी कम होने वाला नहीं है। ईरानी अधिकारियों का डर इस बात की पुष्टि करता है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई कितनी गहरी हो चुकी है।

​निष्कर्ष: यह घटना अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक दुर्लभ उदाहरण है, जहाँ एक शांति वार्ता के बाद किसी डेलिगेशन को घर लौटने के लिए युद्ध जैसे सुरक्षा घेरे (War-like Escort) की आवश्यकता पड़ी। इसने पाकिस्तान, ईरान और इजरायल के बीच के जटिल समीकरणों को एक बार फिर दुनिया के सामने ला दिया है।

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