IPL में ‘पिच के बाहर’ गिरी गेंद पर मचा बवाल: अंपायर ने वाइड नहीं, बल्कि ‘नो बॉल’ क्यों दी?
IPL 2026 के एक रोमांचक मुकाबले के दौरान अंपायर के एक फैसले ने फैंस और क्रिकेट दिग्गजों को हैरान कर दिया। जब गेंद पिच के बाहर गिरी, तो उसे ‘वाइड’ देने के बजाय ‘नो बॉल’ करार दिया गया और अगली गेंद पर फ्री-हिट दी गई।
क्रिकेट के नियमों (MCC Laws) के अनुसार ऐसा क्यों हुआ, यहाँ इसकी पूरी जानकारी आसान शब्दों में दी गई है:
IPL में ‘पिच के बाहर’ गिरी गेंद पर मचा बवाल: अंपायर ने वाइड नहीं, बल्कि ‘नो बॉल’ क्यों दी?
नई दिल्ली | 18 अप्रैल, 2026
क्रिकेट में अक्सर हमने देखा है कि अगर गेंद बल्लेबाज की पहुंच से बहुत दूर हो, तो उसे ‘वाइड’ माना जाता है। लेकिन आईपीएल के हालिया मैच में एक गेंदबाज का कंट्रोल इतना बिगड़ा कि गेंद पिच की सतह (Surface) को छोड़कर बाहर घास पर जा गिरी। अंपायर ने तुरंत हाथ फैलाकर इसे ‘नो बॉल’ का इशारा किया। सोशल मीडिया पर फैंस पूछ रहे हैं कि यह वाइड क्यों नहीं थी?
1. क्या कहता है क्रिकेट का नियम? (MCC Law 21.7)
मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC), जो क्रिकेट के नियम बनाता है, उसके नियम 21.7 के अनुसार:
”अगर गेंद पिच की मुख्य सतह (Main Strip) से बाहर गिरती है, तो अंपायर उसे ‘नो बॉल’ घोषित करेगा।”
वाइड और नो-बॉल में अंतर:
वाइड: गेंद पिच पर तो गिरती है, लेकिन बल्लेबाज के मार पाने के दायरे से बाहर होती है।
पिच के बाहर वाली नो बॉल: अगर गेंद टप्पा खाने से पहले या टप्पा खाते समय पिच के किनारे (Side edges) को पूरी तरह पार कर जाए, तो वह ऑटोमैटिकली नो बॉल हो जाती है।
2. फ्री-हिट का ड्रामा
चूंकि यह एक ‘नो बॉल’ थी, इसलिए नियमानुसार अगली गेंद फ्री-हिट दी गई। अगर इसे ‘वाइड’ करार दिया जाता, तो बल्लेबाज को सिर्फ 1 रन मिलता और अगली गेंद पर वह आउट हो सकता था। लेकिन ‘नो बॉल’ होने के कारण गेंदबाज को दोहरा नुकसान झेलना पड़ा।
3. अगर बल्लेबाज गेंद पर शॉट मार दे तो?
नियमों के अनुसार, अगर गेंद पिच के बाहर गिर रही हो, तो भी बल्लेबाज को उसे खेलने की अनुमति है, बशर्ते उसका शरीर पिच के अंदर रहे। लेकिन जैसे ही गेंद पिच से बाहर गिरी, अंपायर का ‘डेड बॉल’ या ‘नो बॉल’ का निर्णय सर्वोपरि होता है। आधुनिक टी-20 क्रिकेट में इसे सुरक्षा और खेल की मर्यादा के लिहाज से हमेशा ‘नो बॉल’ ही दिया जाता है।
4. गेंदबाज को एक और चेतावनी
ऐसी गेंदों को ‘खतरनाक और अनुचित’ (Dangerous and Unfair) गेंदबाजी की श्रेणी में भी रखा जा सकता है। अगर कोई गेंदबाज बार-बार पिच के बाहर गेंद फेंकता है, तो अंपायर उसे मैच में गेंदबाजी करने से रोक भी सकता है।
निष्कर्ष: अंपायर का फैसला पूरी तरह नियमों के दायरे में था। फैंस की कन्फ्यूजन इसलिए थी क्योंकि आमतौर पर ऐसी गेंदें कम देखने को मिलती हैं। इस फैसले ने मैच का रुख पलट दिया क्योंकि फ्री-हिट पर बल्लेबाज ने छक्का जड़ दिया।
