राजनीति

​मोदी सरकार का ‘नंबरगेम’ फेल: महिला आरक्षण की राह में ‘परिसीमन’ बना रोड़ा, लोकसभा में गिरा बिल

संसद के विशेष सत्र में मोदी सरकार को एक बड़े विधायी झटके का सामना करना पड़ा है। महिला आरक्षण को अमली जामा पहनाने के लिए लाए गए 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में अपेक्षित बहुमत नहीं मिल सका, जिसके कारण यह गिर गया है।

​यहाँ इस पूरे घटनाक्रम पर आधारित विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:

​मोदी सरकार का ‘नंबरगेम’ फेल: महिला आरक्षण की राह में ‘परिसीमन’ बना रोड़ा, लोकसभा में गिरा बिल

​नई दिल्ली | 18 अप्रैल, 2026

​महिला आरक्षण को जल्द लागू करने के मास्टरस्ट्रोक के तौर पर पेश किए गए सरकारी दांव को विपक्ष ने एकजुट होकर विफल कर दिया है। शुक्रवार को लोकसभा में हुए मतदान के दौरान मोदी सरकार संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई (2/3) बहुमत का आंकड़ा नहीं जुटा पाई। इस हार के साथ ही परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेशों से जुड़े अन्य सहायक बिल भी लटक गए हैं।

​1. वोटिंग का गणित: बहुमत से दूर रह गई सरकार

​संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता थी। मतदान के दौरान:

​पक्ष में वोट: 298

​विपक्ष में वोट: 230

​परिणाम: बिल को पास होने के लिए करीब 352-360 वोटों की जरूरत थी, लेकिन सरकार बहुमत से काफी पीछे रह गई।

​2. परिसीमन (Delimitation) पर छिड़ी रार

​विपक्ष के विरोध का मुख्य कारण महिला आरक्षण नहीं, बल्कि इसके साथ जुड़ा परिसीमन का मुद्दा था। विपक्षी दलों, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों के प्रतिनिधियों का आरोप है कि:

​उत्तर-दक्षिण का विभाजन: जनसंख्या के आधार पर सीटों के पुनर्निर्धारण से दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है।

​’चोर दरवाजा’ एंट्री: विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण की आड़ में ‘बैकडोर’ से परिसीमन थोपना चाहती है ताकि चुनावी मानचित्र को अपने पक्ष में बदला जा सके।

​जनगणना का इंतजार: विपक्ष की मांग है कि परिसीमन 2027 की जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों के आने के बाद ही हो, न कि 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर।

​3. विपक्षी एकता ने बिगाड़ा खेल

​इंडिया (INDIA) गठबंधन के नेताओं ने इस मुद्दे पर दुर्लभ एकजुटता दिखाई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सदन में कहा, “यह महिलाओं के सशक्तिकरण का बिल नहीं, बल्कि भारत के चुनावी मानचित्र को बदलने की साजिश है।” वहीं, प्रियंका गांधी वाड्रा ने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया।

​4. सरकार का रुख: ‘महिलाओं का कोप झेलेगा विपक्ष’

​बिल गिरने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ‘उत्तर बनाम दक्षिण’ का फर्जी नैरेटिव गढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगले चुनाव में विपक्ष को देश की महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” के सिद्धांत को लागू करना था।

​5. अब आगे क्या?

​लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की कि मुख्य संविधान संशोधन बिल के गिरने के कारण अब परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 पर कोई आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी।

​निष्कर्ष: 2023 में पारित हुए महिला आरक्षण कानून का क्रियान्वयन अब फिर से अधर में लटक गया है। बिना नए सिरे से संख्या बल जुटाए या सर्वसम्मति बनाए, 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33% आरक्षण मिलना अब एक बड़ी चुनौती नजर आ रहा है।

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