Thursday, September 10, 2026
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पवन खेड़ा की बढ़ीं मुश्किलें: सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद अब गुवाहाटी हाई कोर्ट की शरण में कांग्रेस नेता

पवन खेड़ा की बढ़ीं मुश्किलें: सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद अब गुवाहाटी हाई कोर्ट की शरण में कांग्रेस नेता

​नई दिल्ली/गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी सरमा द्वारा दर्ज कराए गए आपराधिक मामले में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सुप्रीम कोर्ट से ट्रांजिट बेल (अंतरिम राहत) बढ़ाने की याचिका खारिज होने के बाद अब खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है।

​सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और अतुल एस. चंदूरकर की बेंच ने पवन खेड़ा की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें असम की अदालत में जाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने दस्तावेजों में गड़बड़ी को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) बनाने के लिए तेलंगाना हाई कोर्ट में गलत दस्तावेज पेश किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इसे “कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश” करार देते हुए कहा कि यह कोई छोटी गलती नहीं है।

​अभिषेक मनु सिंघवी की दलीलें

खेड़ा के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में सफाई देते हुए कहा कि तेलंगाना में याचिका जल्दबाजी में दाखिल की गई थी। उन्होंने तर्क दिया कि खेड़ा का परिवार हैदराबाद में रहता है, इसलिए वहां आवेदन किया गया था। सिंघवी ने यह भी दावा किया कि जैसे ही सीबीआई ने दस्तावेजों पर सवाल उठाए, सही कागजात जमा कर दिए गए थे। हालांकि, शीर्ष अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और मंगलवार तक ट्रांजिट बेल बढ़ाने से इनकार कर दिया।

​क्या है पूरा मामला?

यह विवाद असम पुलिस में दर्ज एक एफआईआर (FIR) से शुरू हुआ है। पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी सरमा पर कई पासपोर्ट रखने और विदेशी संपत्ति छिपाने के झूठे आरोप लगाए हैं। इस शिकायत में उनके खिलाफ धोखाधड़ी, मानहानि और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई हैं।

​सोमवार को होगी सुनवाई

कोर्ट में छुट्टियों के कारण शनिवार और रविवार को सुनवाई संभव नहीं है। पवन खेड़ा से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट में उनकी जमानत याचिका को सूचीबद्ध (List) किया जा सकता है। तब तक खेड़ा पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती रहेगी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि हाई कोर्ट अपनी कार्यवाही के दौरान शीर्ष अदालत की किसी भी टिप्पणी से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र फैसला ले सकता है।

​नोट: सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि कानूनी प्रक्रिया में पारदर्शिता अनिवार्य है और बनावटी दस्तावेजों के आधार पर क्षेत्राधिकार बनाने का प्रयास अस्वीकार्य है।

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