राजनीति

​क्या है परिसीमन? और क्यों बढ़ने वाली हैं लोकसभा सीटें?

भारत की राजनीति में ‘परिसीमन’ (Delimitation) एक ऐसा शब्द है जो आने वाले वर्षों में देश का राजनीतिक नक्शा पूरी तरह बदल सकता है। महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के पारित होने के बाद इस पर चर्चा और तेज हो गई है, क्योंकि आरक्षण लागू होने की पहली शर्त ही परिसीमन है।

​आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा मसला क्या है और लोकसभा सीटें 543 से बढ़कर 850 (या उससे अधिक) कैसे हो सकती हैं।

​क्या है परिसीमन? और क्यों बढ़ने वाली हैं लोकसभा सीटें?

​1. परिसीमन (Delimitation) क्या होता है?

​परिसीमन का सीधा अर्थ है— किसी राज्य की लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं का दोबारा निर्धारण करना। * यह काम एक स्वतंत्र ‘परिसीमन आयोग’ (Delimitation Commission) करता है।

​इसका मुख्य आधार जनसंख्या होती है। संविधान कहता है कि हर सीट पर जनसंख्या का अनुपात लगभग समान होना चाहिए ताकि “एक वोट, एक मूल्य” का सिद्धांत बना रहे।

​2. अभी तक सीटें क्यों नहीं बढ़ीं?

​वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटें 1971 की जनगणना के आधार पर तय हैं।

​1976 में आपातकाल के दौरान 42वें संविधान संशोधन के जरिए सीटों की संख्या को 2001 तक के लिए फ्रीज कर दिया गया था।

​बाद में 2002 में इसे फिर से 2026 तक के लिए बढ़ा दिया गया। तर्क यह था कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया है, उन्हें सीटें कम होने का नुकसान न उठाना पड़े।

​3. 850 सीटें होने का गणित क्या है?

​2026 में परिसीमन पर लगा प्रतिबंध खत्म हो जाएगा। इसके बाद जो नई जनगणना (संभवतः 2021 की लंबित जनगणना जो अब होगी) होगी, उसके आधार पर सीटें बढ़ाई जाएंगी।

​जनसंख्या विस्फोट: 1971 में भारत की आबादी करीब 54 करोड़ थी, जो अब 140 करोड़ पार कर चुकी है।

​नया संसद भवन: दिल्ली में बना नया संसद भवन (New Parliament House) इसी भविष्य को देखते हुए तैयार किया गया है। इसमें लोकसभा की 888 सीटें और राज्यसभा की 384 सीटें रखने की क्षमता है।

​अनुमान है कि नई आबादी के अनुपात में लोकसभा सीटों की संख्या 750 से 850 के बीच हो सकती है।

​4. इस बिल और प्रक्रिया से क्या बदलाव आएंगे?

​उत्तर बनाम दक्षिण का विवाद: परिसीमन का सबसे विवादित हिस्सा यही है। उत्तर भारतीय राज्यों (जैसे UP, बिहार) की जनसंख्या तेजी से बढ़ी है, जिससे उनकी सीटें काफी बढ़ जाएंगी। वहीं, दक्षिण भारतीय राज्यों (जैसे केरल, तमिलनाडु) ने जनसंख्या पर नियंत्रण पाया है, जिससे उन्हें डर है कि संसद में उनका प्रतिनिधित्व और राजनीतिक प्रभाव कम हो जाएगा।

​महिला आरक्षण: 2023 में पास हुए महिला आरक्षण बिल के अनुसार, महिलाओं को 33% आरक्षण तभी मिलेगा जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।

​5. परिसीमन की समयसीमा (Timeline)

​जनगणना: सबसे पहले देश में जनगणना (Census) कराई जाएगी।

​आयोग का गठन: जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन आयोग का गठन होगा।

​सीटों का निर्धारण: आयोग तय करेगा कि किस राज्य में कितनी सीटें होंगी और उनकी सीमाएं क्या होंगी।

​कार्यान्वयन: उम्मीद की जा रही है कि 2029 के लोकसभा चुनाव नए परिसीमन के आधार पर हो सकते हैं।

​निष्कर्ष

​लोकसभा की सीटें बढ़ना केवल संख्या का खेल नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र में जनता की आवाज को और सटीक बनाने की कोशिश है। हालांकि, क्षेत्रीय असंतुलन को रोकना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

​बड़ा सवाल: क्या ज्यादा सीटें होने से शासन व्यवस्था बेहतर होगी या इससे केवल राजनीतिक खींचतान बढ़ेगी? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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