अन्तर्राष्ट्रीय

​रहस्य के घेरे में ईरान के नए सुप्रीम लीडर: हमले में बिगड़ा चेहरा और गंवाया पैर, अब ‘ऑडियो कॉल’ से चला रहे हुकूमत

​रहस्य के घेरे में ईरान के नए सुप्रीम लीडर: हमले में बिगड़ा चेहरा और गंवाया पैर, अब ‘ऑडियो कॉल’ से चला रहे हुकूमत

​तेहरान/दुबई: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई की सेहत को लेकर लंबे समय से जारी सस्पेंस अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने करीबी सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि 28 फरवरी के भीषण हमले में बुरी तरह जख्मी होने के बाद अब मुज्तबा के जख्म भरने लगे हैं। हालांकि, उनकी शारीरिक स्थिति अभी भी ऐसी नहीं है कि वे दुनिया के सामने आ सकें।

​28 फरवरी का वो हमला: क्या खोया और क्या बचा?

​मध्य तेहरान स्थित सुप्रीम लीडर के कंपाउंड पर अमेरिका और इजरायल के उस साझा हमले ने पूरे ईरान को हिला कर रख दिया था। इस हमले में तत्कालीन सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई थी।

​गंभीर चोटें: मुज्तबा खामेनेई इस हमले में चमत्कारिक रूप से बच तो गए, लेकिन उनका चेहरा बुरी तरह बिगड़ गया।

​पैर खोने की खबर: अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और इंटेलिजेंस सूत्रों का दावा है कि मुज्तबा ने अपना एक पैर खो दिया है और उनके दूसरे पैर में भी गंभीर चोटें हैं।

​सुप्रीम लीडर बनने के बाद भी ‘गायब’

​8 मार्च को मुज्तबा को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया था, लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी उनकी कोई तस्वीर या वीडियो सामने नहीं आया है।

​ऑडियो हुकूमत: सूत्रों के अनुसार, मुज्तबा मानसिक रूप से पूरी तरह सचेत हैं। वे वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऑडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकें कर रहे हैं।

​अहम फैसले: जंग की रणनीति और अमेरिका के साथ बातचीत जैसे बड़े मुद्दों पर अभी भी अंतिम मुहर मुज्तबा ही लगा रहे हैं, लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी ने देश के भीतर ‘शक्ति के शून्य’ (Power Vacuum) की चर्चा शुरू कर दी है।

​ईरानी मीडिया का ‘जांबाज’ कोड

​ईरान की सरकारी मीडिया ने मुज्तबा की सेहत पर कोई आधिकारिक बुलेटिन जारी नहीं किया है, लेकिन उन्हें ‘जांबाज’ कहकर संबोधित किया जा रहा है। ईरान में यह शब्द उन योद्धाओं के लिए इस्तेमाल होता है जो जंग में अपने शरीर का कोई अंग गंवा देते हैं। उनके हर संदेश को न्यूज़ एंकर ही पढ़कर सुना रहे हैं, जिससे उनकी सेहत को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

​क्या पिता जैसा दबदबा कायम कर पाएंगे?

​विशेषज्ञों का मानना है कि मुज्तबा के लिए यह राह आसान नहीं होगी। मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के एलेक्स वटांका के अनुसार:

​”मुज्तबा की आवाज फिलहाल सुनी जा रही है, लेकिन वह वैसी ‘निर्णायक आवाज’ नहीं बन पाई है जैसी उनके पिता की थी। उन्हें खुद को एक शक्तिशाली लीडर के रूप में साबित करने के लिए जल्द ही जनता के सामने आना होगा।”

​सोशल मीडिया पर वायरल हुई ‘खाली कुर्सी’

​ईरान की जनता में अपने नए लीडर को न देख पाने की बेचैनी बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर एक मीम तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें एक खाली जगमगाती कुर्सी दिखाई गई है और नीचे कैप्शन लिखा है— “मुज्तबा कहां हैं?”

​निष्कर्ष: ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। एक तरफ बाहरी देशों से युद्ध का खतरा है, तो दूसरी तरफ एक ऐसे लीडर की चुनौती जो फिलहाल सिर्फ पर्दे के पीछे से देश चलाने को मजबूर है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *