ईरान का ‘चोकपॉइंट’ दांव: होर्मुज से निकलने के लिए अब देना होगा भारी टोल, क्रिप्टोकरेंसी में भुगतान की भी तैयारी!
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स वसूलने का एक महत्वाकांक्षी और विवादास्पद प्लान तैयार किया है। अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, यह कदम अमेरिका और इजरायल के साथ हालिया संघर्ष के बाद ‘सीजफायर’ (Ceasefire) समझौते के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
यहाँ ईरान के इस ‘टोल टैक्स’ प्लान की मुख्य बातें दी गई हैं:
1. कितना होगा टैक्स (टोल फीस)?
प्रति जहाज शुल्क: खबरों के अनुसार, ईरान प्रत्येक वाणिज्यिक जहाज से करीब 20 लाख डॉलर ($2 Million) प्रति ट्रांजिट वसूलने की योजना बना रहा है। भारतीय मुद्रा में यह करीब 16.5 से 18.5 करोड़ रुपये बैठता है।
प्रति बैरल शुल्क: कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि तेल टैंकरों पर $1 प्रति बैरल का टोल लगाया जा सकता है।
2. भुगतान का तरीका (Currency)
ईरान ने इस टैक्स को वसूलने के लिए अनोखे तरीके प्रस्तावित किए हैं ताकि पश्चिमी प्रतिबंधों से बचा जा सके:
क्रिप्टोकरेंसी (Bitcoin): लेनदेन को ट्रैक होने से बचाने के लिए ‘बिटकॉइन’ में भुगतान की शर्त रखी जा सकती है।
ईरानी रियाल: ईरान के संसदीय प्रस्ताव के अनुसार, कुछ मामलों में भुगतान उनकी राष्ट्रीय मुद्रा ‘रियाल’ में करने को कहा जा सकता है।
3. ओमान के साथ साझेदारी
होर्मुज जलडमरूमध्य का रास्ता ईरान और ओमान दोनों की समुद्री सीमा से साझा होता है। रिपोर्टों के अनुसार, वसूले गए टैक्स का एक हिस्सा ओमान को भी दिया जा सकता है। ईरान का तर्क है कि इस राजस्व का उपयोग युद्ध में क्षतिग्रस्त हुए बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के पुनर्निर्माण के लिए किया जाएगा।
4. अमेरिका और दुनिया का रुख
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “अवैध” बताया है और स्पष्ट किया है कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में किसी भी तरह के टोल को स्वीकार नहीं करेगा।
UNCLOS नियम: अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के अनुसार, होर्मुज जैसे ‘स्ट्रेट’ से जहाजों को बिना किसी बाधा या टैक्स के गुजरने का अधिकार (Transit Passage) प्राप्त है।
5. भारत पर असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों (तेल और गैस) का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से मंगवाता है। हालांकि ईरान ने भारत को एक ‘मित्र देश’ बताया है, लेकिन यदि यह टैक्स लागू होता है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
विशेष नोट: फिलहाल यह प्लान बातचीत और प्रस्तावों के स्तर पर है। ईरान का दावा है कि यह उसकी “ताकत” का प्रतीक है, जबकि दुनिया इसे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा मान रही है।
