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DA Hike Update: 15 सालों में पहली बार इतनी देरी, क्या ‘फ्रीज’ होगा महंगाई भत्ता? वित्त मंत्री को पत्र लिखकर जताई बड़ी आशंका

DA Hike Update: 15 सालों में पहली बार इतनी देरी, क्या ‘फ्रीज’ होगा महंगाई भत्ता? वित्त मंत्री को पत्र लिखकर जताई बड़ी आशंका

​नई दिल्ली: केंद्र सरकार के करीब 49 लाख कर्मचारियों और 68 लाख पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) का इंतजार लंबा होता जा रहा है। जनवरी 2026 से देय DA बढ़ोतरी की घोषणा में हो रही रिकॉर्ड देरी ने कर्मचारियों के बीच डर और असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है। अप्रैल के 10 दिन बीतने के बाद भी अब तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।

​वित्त मंत्री को लिखे गए पत्र: ‘कोविड’ जैसा डर

​कर्मचारी संगठनों ने अब सीधे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के दरवाजे पर दस्तक दी है।

​’ऑल इंडिया NPS एम्प्लाइज फेडरेशन’ (AINPSEF): अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने वित्त मंत्री को लिखे पत्र में चेतावनी दी है कि इस देरी से कर्मचारियों के मन में यह डर बैठ गया है कि कहीं कोविड-19 काल की तरह इस बार भी DA को ‘फ्रीज’ न कर दिया जाए।

​CCGAW का रुख: महासचिव एसबी यादव ने पत्र में कहा कि पिछले 15 सालों में ऐसा कभी नहीं हुआ कि अप्रैल तक घोषणा न हुई हो। आमतौर पर मार्च के आखिरी हफ्ते तक ऐलान हो जाता है और अप्रैल में एरियर मिल जाता है।

​देरी के पीछे ‘विधानसभा चुनाव’ या ‘प्रशासनिक अड़चन’?

​देरी की वजहों को लेकर गलियारों में दो मुख्य अटकलें लगाई जा रही हैं:

​चुनाव आचार संहिता: कर्मचारियों के बीच यह धारणा बन रही है कि पश्चिम बंगाल और असम में हो रहे विधानसभा चुनावों की वजह से सरकार ने घोषणा रोक रखी है।

​प्रशासनिक प्रक्रिया: विशेषज्ञों का मानना है कि आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की तैयारी और प्रशासनिक अप्रूवल साइकिल में लगने वाला समय इस देरी का असली कारण हो सकता है।

​कितना बढ़ेगा आपका वेतन?

​AICPI-IW के आंकड़ों के आधार पर गणना स्पष्ट है:

​मौजूदा DA: 58%

​प्रस्तावित बढ़ोतरी: 2%

​नया अनुमानित DA: 60%

​राहत की बात: मिलेगा पूरा एरियर

​भले ही घोषणा में देरी हो रही है, लेकिन कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत यह है कि जब भी कैबिनेट इस पर मुहर लगाएगी, उन्हें जनवरी 2026 से लेकर अब तक का पूरा बकाया (Arrears) एक साथ दिया जाएगा।

​कर्मचारियों की मांग: जल्द हो हस्तक्षेप

​कर्मचारी संगठनों ने वित्त मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि सरकार के प्रति कर्मचारियों का विश्वास बना रहे और उनका मनोबल न गिरे। फिलहाल सबकी निगाहें केंद्रीय कैबिनेट की अगली बैठक पर टिकी हैं।

​संक्षेप में: 15 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है, कर्मचारी ‘फ्रीज’ होने की आशंका से डरे हुए हैं और 2% बढ़ोतरी की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं। अब गेंद सरकार के पाले में है।

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