राजनीति

चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों में ठनी: डेलिगेशन की मीटिंग में तल्खी के पीछे की असली वजह

आज (8 अप्रैल 2026) सुबह दिल्ली में त्रिणमूल कांग्रेस (TMC) के चार सदस्यीय डेलिगेशन और चुनाव आयोग (ECI) की फुल बेंच के बीच बैठक महज 7 से 11 मिनट में तनावपूर्ण हो गई और अचानक खत्म हो गई। TMC सांसद दerek ओ’Brien ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने उन्हें “Get Lost” कहकर भगा दिया, जबकि EC सूत्रों ने आरोप लगाया कि ओ’Brien ने चीख-चीखकर बात की, आयुक्तों को बोलने नहीं दिया और अनुचित व्यवहार किया।

आज की बैठक में क्या हुआ?

TMC डेलिगेशन में derek O’brien, सागरिका घोष, मेनका गुरुस्वामी और साकेत गोखले शामिल थे।

उन्होंने ममता बनर्जी के लिखे 9 पत्र पेश किए, जिनका कोई जवाब नहीं मिला।

पश्चिम बंगाल में 91 लाख वोटरों की सूची से नाम काटे जाने, BJP से कथित लिंक वाले 6 अधिकारियों (खासकर CEO और Nandigram वाले) के ट्रांसफर और पक्षपाती रवैये का मुद्दा उठाया।

TMC का आरोप: पत्र अगर मोदी या अमित शाह के होते तो तुरंत जवाब आ जाता।

EC का जवाब: आगामी बंगाल चुनाव “भयमुक्त, हिंसामुक्त, धमकी-मुक्त” होंगे। लेकिन TMC ने इसे बीच में ही काट दिया।

बैठक 10:02 बजे शुरू हुई और 10:07-10:13 बजे तक खत्म। TMC नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और CEC को “चोर, क्रिमिनल” तक कहा।

EC ने TMC को चेतावनी दी है कि बंगाल में चुनाव भय, हिंसा, धमकी, प्रलोभन, बूथ जामिंग से मुक्त होंगे।

क्यों बार-बार भिड़ते हैं चुनाव आयोग और राजनीतिक पार्टियां?

भारत में चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका काम निष्पक्ष चुनाव कराना है। लेकिन पिछले कई सालों से विपक्षी पार्टियां (TMC, कांग्रेस, आदि) इसे BJP के पक्ष में पक्षपाती बताती रही हैं। मुख्य कारण ये हैं:

वोटर लिस्ट रिवीजन और नाम काटना: बंगाल में 91 लाख नाम हटाने पर TMC का आरोप है कि यह BJP के फायदे के लिए हो रहा है। पहले भी कई राज्यों में Special Intensive Revision (SIR) पर विवाद हुआ। EC कहता है कि फर्जी वोटर हटाने के लिए जरूरी है, लेकिन विपक्ष इसे “वोट चोरी” का हिस्सा बताता है।

अधिकारियों के ट्रांसफर: पार्टियां आरोप लगाती हैं कि EC उन अधिकारियों को ट्रांसफर करता है जो सत्ताधारी के खिलाफ हैं या विपक्ष के करीबी हैं। TMC ने आज भी BJP से जुड़े अधिकारियों के ट्रांसफर की मांग की।

मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) लागू करने में कथित नरमी: विपक्ष का आरोप — सत्ताधारी दल (BJP) के नेताओं के हेट स्पीच, प्रचार पर सख्ती नहीं बरती जाती, जबकि विपक्षी नेताओं पर तुरंत नोटिस। बंगाल में TMC और BJP दोनों ने एक-दूसरे पर हेट स्पीच और धमकी के शिकायतें EC में दी हैं।

वोटर टर्नआउट डेटा और EVM विवाद: पुराने मुद्दे जैसे EVM में गड़बड़ी, वोटर टर्नआउट आंकड़ों में देरी आदि। विपक्ष कहता है कि EC पारदर्शिता नहीं बरतता।

राजनीतिक दबाव और चुनावी रणनीति:

सत्ताधारी दल EC को “निष्पक्ष” बताता है।

विपक्ष हार के डर या वोट बैंक बचाने के लिए EC पर हमला बोलकर जनता में “धांधली” का नैरेटिव बनाता है।

बंगाल जैसे हिंसा-प्रवण राज्यों में (जहां TMC की सरकार है) EC सख्ती दिखाता है, तो सत्ताधारी पार्टी नाराज हो जाती है।

बंगाल 2026 चुनाव का संदर्भ

2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। TMC सत्ता में है, लेकिन BJP लगातार चुनौती दे रही है। वोटर लिस्ट संशोधन, अधिकारी ट्रांसफर और हिंसा-मुक्त चुनाव की गारंटी जैसे मुद्दों पर तनाव बढ़ा हुआ है। TMC इसे “BJP-EC गठजोड़” बता रही है, जबकि EC कह रहा है कि वह सभी के लिए समान नियम लागू करेगा।

नोट: चुनाव आयोग का काम बेहद संवेदनशील है। पार्टियां जब अपनी मांगें पूरी नहीं होतीं, तो अक्सर गहमागहमी और आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो जाता है। आज की घटना भी उसी का हिस्सा लगती है। EC ने पहले भी कई पार्टियों (BJP सहित) से मिलकर शिकायतें सुनी हैं, लेकिन विपक्ष इसे पर्याप्त नहीं मानता।

पश्चिम बंगाल की सियासत में यह तनाव 2026 चुनाव तक और बढ़ सकता है। दोनों पक्षों की शिकायतें और EC का रुख आगे की सुनवाई में साफ होगा। आगे की अपडेट्स के लिए खबरें फॉलो करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *