ईरान में 165 लड़कियों की मौत का मामला: अमेरिका पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव, चीन ने दी बड़ी सहायता की पेशकश
ईरान में 165 लड़कियों की मौत का मामला: अमेरिका पर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय दबाव, चीन ने दी बड़ी सहायता की पेशकश
तेहरान/बीजिंग: ईरान में पिछले हफ्ते स्कूलों पर कथित केमिकल अटैक में 165 लड़कियों की मौत ने वैश्विक स्तर पर हंगामा मचा दिया है। इस घटना को लेकर अमेरिका पर आरोप लग रहे हैं कि उसके समर्थित ग्रुप्स या इजरायल ने इसे अंजाम दिया, जबकि चीन ने ईरान को मानवीय सहायता का बड़ा पैकेज ऑफर कर अमेरिका को कूटनीतिक रूप से घेरने की कोशिश की है। 13 मार्च 2026 को UN में हुई डिबेट में अमेरिका बैकफुट पर नजर आया, जबकि चीन के राजदूत ने इसे “मानवता के खिलाफ अपराध” बताते हुए जांच की मांग की।
क्या है पूरा मामला?
घटना 5 मार्च 2026 को ईरान के कुम और तेहरान में कई गर्ल्स स्कूलों में हुई, जहां छात्राओं ने केमिकल गैस से सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की।
शुरुआत में 500+ लड़कियां प्रभावित हुईं, लेकिन अब मौतों का आंकड़ा 165 पहुंच गया है – ज्यादातर 12-16 साल की उम्र की।
ईरान सरकार ने इसे “अमेरिका-इजरायल की साजिश” बताया, दावा किया कि ये ईरान युद्ध (Iran-Israel-US War) का हिस्सा है और स्कूलों को टारगेट कर महिलाओं की शिक्षा को निशाना बनाया गया।
कुछ रिपोर्ट्स (Amnesty International, HRW) में कहा गया कि गैस नर्व एजेंट जैसी थी, जो ईरान के विरोधी ग्रुप्स इस्तेमाल कर सकते हैं।
ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई (जो खुद घायल हैं) ने इसे “इस्लामिक रिपब्लिक पर हमला” बताया और बदला लेने की धमकी दी।
अमेरिका क्यों फंसा?
अमेरिका ने घटना की निंदा तो की, लेकिन जांच में सहयोग करने से इनकार कर दिया। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि ये ईरान की “आंतरिक समस्या” है और “प्रोपेगैंडा” हो सकती है।
लेकिन UN और EU ने अमेरिका पर दबाव बढ़ाया – ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा कि अगर अमेरिका ने इजरायल को सपोर्ट किया तो ये “मानवाधिकार उल्लंघन” है।
कुछ लीक रिपोर्ट्स में अमेरिकी इंटेलिजेंस का जिक्र है, जिससे अमेरिका की इमेज खराब हो रही है। ट्रंप ने X पर पोस्ट किया: “ईरान झूठ फैला रहा है, लेकिन हम जांच के लिए तैयार हैं अगर वो युद्ध रोकें।”
चीन ने कैसे घेरा?
चीन ने ईरान को $500 मिलियन की मानवीय सहायता की पेशकश की – इसमें मेडिकल सप्लाई, जांच टीमें और स्कूलों की रिपेयरिंग शामिल।
चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा: “चीन ईरान का सच्चा दोस्त है। ये मौतें दुखद हैं, और हम अमेरिका की भूमिका की जांच चाहते हैं।”
ये कदम चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का हिस्सा लगता है – ईरान में पहले से चाइनीज निवेश है, और अब वो अमेरिका को “आइसोलेट” करने की कोशिश कर रहा है।
रूस ने भी चीन का समर्थन किया, कहा कि UNSC में प्रस्ताव लाएंगे।
भारत की प्रतिक्रिया क्या है?
भारत ने घटना की निंदा की और ईरान को मेडिकल एड ऑफर किया, लेकिन युद्ध में तटस्थ रहते हुए कहा कि “नागरिकों पर हमला अस्वीकार्य है।”
दिल्ली में MEA ने कहा: “हम जांच की मांग करते हैं, लेकिन ये वैश्विक शांति को प्रभावित कर रहा है।”
ये मामला ईरान युद्ध को और जटिल बना रहा है – अगर जांच में अमेरिका की भूमिका साबित हुई तो बड़ा डिप्लोमैटिक संकट आ सकता है। क्या आपको लगता है ये साजिश है या दुर्घटना? कमेंट में बताएं।
