सम्राट से नित्यानंद तक: बिहार का अगला CM कौन? 6 प्रमुख दावेदार और उनकी मजबूत दावेदारी
पटना: बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर! मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की अटकलों के बीच अगले सीएम की रेस तेज हो गई है। एनडीए गठबंधन में बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री चुना जाएगा, और नीतीश कुमार की सहमति भी ली जाएगी। मुख्य रूप से जातिगत संतुलन (कुर्मी सीएम हटने के बाद कोईरी या अन्य पिछड़ी जाति) पर फोकस है। चर्चा में 6 प्रमुख नाम हैं – सम्राट चौधरी, नित्यानंद राय, संतोष चौरसिया, जनक राम, दिलीप जायसवाल और गायत्री देवी। आइए जानते हैं प्रत्येक की पृष्ठभूमि और मजबूत दावेदारी के कारण:
1. सम्राट चौधरी
पृष्ठभूमि: वर्तमान उपमुख्यमंत्री, 57 वर्ष के, कोईरी (कुशवाहा) जाति से। मुंगेर के लखनपुर में जन्मे, पिता शकुनी चौधरी दिग्गज नेता थे। पहले आरजेडी में थे, अब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।
क्यों प्रबल दावेदार?: कोईरी जाति से होने से सत्ता संतुलन बना रहेगा (कुर्मी सीएम हट रहे हैं)। नीतीश कुमार के साथ हर जगह दिखाई देते रहे, और बीजेपी विधायक दल के नेता हैं। हालांकि, मूल भाजपा कैडर नहीं होने से कुछ विरोध है।
2. नित्यानंद राय
पृष्ठभूमि: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री, यादव जाति से, उजियारपुर से सांसद। अमित शाह के बेहद करीबी माने जाते हैं।
क्यों प्रबल दावेदार?: अमित शाह ने सार्वजनिक रूप से “बड़ी जिम्मेदारी” की बात कही है। यादव जाति से होने से बीजेपी आरजेडी के यादव वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। हालिया लोकसभा चुनाव में अपनी ताकत साबित की।
3. संतोष चौरसिया (संजीव चौरसिया)
पृष्ठभूमि: पटना के दीघा से विधायक, अत्यंत पिछड़ी जाति से। पिता भी विधायक और भाजपा संस्थापक रहे।
क्यों प्रबल दावेदार?: अत्यंत पिछड़ी जाति से होने से बीजेपी सामाजिक समीकरण मजबूत कर सकती है। हालांकि, पटना से दो बड़े पद (राष्ट्रीय अध्यक्ष और सीएम) एक साथ देने पर सवाल हैं।
4. जनक राम
पृष्ठभूमि: रविदास समुदाय से, 52 वर्ष के। पूर्व मंत्री।
क्यों प्रबल दावेदार?: यदि बीजेपी दलित सीएम बनाना चाहे, तो इनकी किस्मत खुल सकती है। हालांकि, हाल ही में शिवेश राम (रविदास समुदाय) को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया गया, जो दावेदारी कमजोर कर सकता है।
5. दिलीप जायसवाल
पृष्ठभूमि: वैश्य समाज से, पूर्व मंत्री। भाजपा के वरिष्ठ नेता।
क्यों प्रबल दावेदार?: वैश्य समाज से होने से बीजेपी वैश्य वोटर्स को साध सकती है। संगठन में अच्छी पकड़ है।
6. गायत्री देवी
पृष्ठभूमि: सीतामढ़ी के परिहार से विधायक, यादव समुदाय से। लगातार तीसरी बार विधायक बनीं।
क्यों प्रबल दावेदार?: यादव समुदाय से महिला उम्मीदवार होने से बीजेपी की रणनीति में फिट बैठ सकती हैं। महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बन सकती हैं, हालांकि विशिष्ट मजबूत कारण कम हैं।
अंतिम फैसला बीजेपी हाईकमान का होगा, और नीतीश कुमार की भूमिका अहम रहेगी। नीतीश के बेटे निशांत कुमार को भी जेडीयू में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है, लेकिन सीएम पद बीजेपी का होगा। बिहार की सियासत में आगे क्या होगा, ये आने वाले दिनों में साफ होगा।
