ईरान की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से ऑयल सप्लाई चेन पर गहरा संकट, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की लंबी कतारें खड़ी
ईरान की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से ऑयल सप्लाई चेन पर गहरा संकट, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की लंबी कतारें खड़ी
दुबई/तेहरान: मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तेज होती जंग ने अब वैश्विक ऊर्जा सप्लाई चेन को सीधे निशाना बना दिया है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है, जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग पर जहाजों की आवाजाही ठप हो गई। समुद्री ट्रैकिंग डेटा से मिली तस्वीरें डरावनी हैं—स्ट्रेट के दोनों छोर पर सैकड़ों ऑयल टैंकर और कार्गो जहाज बेबस खड़े नजर आ रहे हैं, जैसे कोई बड़ा युद्धक्षेत्र बन गया हो।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने VHF रेडियो के जरिए जहाजों को चेतावनी दी कि कोई भी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर सकता। यह कदम अमेरिका और इजरायल के हालिया बड़े हमलों का जवाब माना जा रहा है, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय के पास भी हमले हुए। ईरान ने इसे ‘ऑयल बम’ की तरह इस्तेमाल करते हुए क्षेत्र में तेल निर्यात को ठप करने की कोशिश की है।
हाल के दिनों में स्ट्रेट के पास कई जहाजों पर हमले हुए। एक पलाऊ फ्लैग वाला तेल टैंकर ‘स्काईलाइट’ ओमान के पास निशाना बना, जिसमें 15 भारतीय क्रू मेंबर सहित 20 लोग सवार थे। चार लोग घायल हुए, लेकिन सभी को सुरक्षित निकाला गया। ब्रिटिश मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने कम से कम तीन जहाजों पर हमलों की पुष्टि की, जिसमें मिसाइल और अज्ञात प्रोजेक्टाइल शामिल हैं। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि कुछ टैंकर जल रहे हैं और एक जहाज डूब रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और काफी मात्रा में प्राकृतिक गैस (LNG) का मुख्य मार्ग है। रोजाना औसतन 20 मिलियन बैरल तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इसका बंद होना वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल ला सकता है। ब्रेंट क्रूड पहले ही 10% से ज्यादा बढ़कर 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जबकि गैस कीमतों में 25% तक की तेजी आई है। एशिया, खासकर भारत और चीन, सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि भारत अपना लगभग 50% कच्चा तेल इसी रास्ते से आयात करता है।
शिपिंग कंपनियां अब खाड़ी से जहाज हटा रही हैं और वैकल्पिक रास्तों की तलाश कर रही हैं, लेकिन इससे लागत और समय दोनों बढ़ेंगे। अमेरिका ने जहाजों को खाड़ी से दूर रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबी चली तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा—पेट्रोल-डीजल महंगा होने से महंगाई बढ़ेगी और बाजारों में हलचल मचेगी।
ईरान का यह कदम ‘सर्जिकल’ नहीं बल्कि रणनीतिक लगता है, क्योंकि लंबे समय तक स्ट्रेट बंद रखना उसके अपने निर्यात को भी प्रभावित करेगा। लेकिन फिलहाल यह जंग का सबसे खतरनाक मोड़ बन गया है, जहां तेल की सप्लाई चेन पर सीधा हमला हो रहा है और जहाजों की बेबसी का नक्शा पूरी दुनिया देख रही है।
