राजनीति

नीतीश कुमार के 75वें जन्मदिन पर बेटे निशांत की एंट्री की चर्चा तेज, जेडीयू में बढ़ी उलझन

नीतीश कुमार के 75वें जन्मदिन पर बेटे निशांत की एंट्री की चर्चा तेज, जेडीयू में बढ़ी उलझन

पटना: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल ही में 75 वर्ष की उम्र पूरी की है। इस मौके पर जहां एक तरफ पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं ने उन्हें बधाई दी, वहीं उनकी नजरें उनके इकलौते बेटे निशांत कुमार पर टिक गईं। निशांत के राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की मांग फिर से जोर पकड़ गई है, जिससे जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अंदर गहरी बहस और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।

नीतीश कुमार के जन्मदिन पर पटना में जेडीयू कार्यालय के बाहर और सड़कों पर पोस्टर लगे दिखे, जिनमें निशांत को पार्टी की अगली पीढ़ी का चेहरा बताते हुए उनकी एंट्री की मांग की गई। कुछ जगहों पर केक काटते समय कार्यकर्ताओं ने निशांत के नाम के नारे भी लगाए। निशांत खुद भी इस दिन पिता के पास पहुंचे, महावीर मंदिर और इस्कॉन मंदिर में पूजा-अर्चना की, फिर मुख्यमंत्री आवास जाकर पैर छूकर आशीर्वाद लिया और प्रसाद बांटा। इन तस्वीरों ने राजनीतिक हलकों में नई हलचल मचा दी।

जेडीयू के कई वरिष्ठ नेता, जिनमें कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा जैसे नाम शामिल हैं, खुलकर कह रहे हैं कि पार्टी के ज्यादातर कार्यकर्ता और समर्थक निशांत को सक्रिय राजनीति में देखना चाहते हैं। उनका मानना है कि नीतीश की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए पार्टी को भविष्य के लिए तैयार रहना चाहिए। कुछ सूत्रों के अनुसार, निशांत की राज्यसभा में एंट्री या पार्टी में कोई बड़ी जिम्मेदारी जैसे विकल्पों पर भी विचार चल रहा है।

हालांकि, नीतीश कुमार लंबे समय से परिवारवाद के खिलाफ रहे हैं। उन्होंने अक्सर कहा है कि वे बिहार को परिवार से ऊपर रखते हैं। ऐसे में निशांत की एंट्री पर उनका रुख अभी साफ नहीं है। पार्टी के अंदर एक धड़ा मानता है कि निशांत की सादगी और शांत स्वभाव पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है, खासकर जब पड़ोसी दलों में युवा चेहरों की कमान संभाली जा रही है। लेकिन दूसरी तरफ चिंता है कि इससे नीतीश की छवि पर असर पड़ सकता है।

विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर तंज कस रहे हैं, जबकि कुछ NDA सहयोगी इसे पार्टी की मजबूती के रूप में देख रहे हैं। कुल मिलाकर, नीतीश के 75 पार होते ही बिहार की सियासत में निशांत कुमार का नाम फिर प्रमुखता से उभर आया है, और जेडीयू के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि पार्टी का भविष्य किस दिशा में जाएगा।

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