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OLA CEO भाविश अग्रवाल के खिलाफ बेलेबल अरेस्ट वारंट जारी, जानिए पूरा मामला

OLA CEO भाविश अग्रवाल के खिलाफ बेलेबल अरेस्ट वारंट जारी, जानिए पूरा मामला

बेंगलुरु स्थित Ola Electric के फाउंडर और CEO भाविश अग्रवाल के खिलाफ गोवा के दक्षिण गोवा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Disputes Redressal Commission) ने बेलेबल गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह वारंट 4 फरवरी 2026 को सुनवाई के दौरान उनके न पेश होने के कारण जारी किया गया।

क्या है पूरा मामला?

एक उपभोक्ता, प्रीतेश चंद्रकांत घाड़ी (चिकलिम, मोरमुगांव, गोवा) ने Ola S1 Pro 2nd Generation इलेक्ट्रिक स्कूटर की शिकायत दर्ज की थी।

स्कूटर की खरीद 16 अगस्त 2023 को हुई थी (कीमत ₹1,47,499) और डिलीवरी 2 नवंबर 2023 को हुई।

स्कूटर में बार-बार खराबी आई – मोटर में अनचाही आवाज, टचस्क्रीन बार-बार रीबूट होना, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी की समस्या।

उपभोक्ता ने इसे सर्विस के लिए वास्को के Ola डीलर को दिया, लेकिन स्कूटर की मरम्मत नहीं हुई और अब उसका पता ही नहीं चल रहा (स्कूटर गायब होने का आरोप)।

शिकायतकर्ता ने पूरा पैसा वापस, ₹50,000 मुआवजा और मुकदमे का खर्च मांगा है।

आयोग ने जनवरी 2026 में भाविश अग्रवाल को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का नोटिस जारी किया था, ताकि वे स्कूटर की लोकेशन बताएं और कारण समझाएं कि इतने समय बाद भी क्यों नहीं लौटाया गया। नोटिस 28 जनवरी को जारी हुआ और 4 फरवरी को सुनवाई तय थी।

लेकिन भाविश अग्रवाल पेश नहीं हुए। उनके वकील ने कहा कि उन्हें कोई निर्देश नहीं मिला। आयोग ने दो बार केस कॉल किया, फिर भी अनुपस्थिति पर बेलेबल वारंट जारी कर दिया।

वारंट की डिटेल्स

जारी करने की तारीख: फरवरी 2026 (कुछ रिपोर्ट्स में 11 या 13 फरवरी)

सेक्शन: Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita (BNSS) की धारा 73 के तहत

बेल अमाउंट: ₹1,47,499 (स्कूटर की कीमत के बराबर) + एक जमानतदार

पुलिस को निर्देश: कोरमंगला पुलिस स्टेशन, बेंगलुरु को वारंट भेजा गया है। पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर 23 फरवरी 2026 को सुबह 10:30 बजे मार्गांव (गोवा) में आयोग के सामने पेश करना है।

जमानत पर रिहा किया जा सकता है।

बड़ा बैकग्राउंड

यह मामला Ola Electric के खिलाफ गोवा और अन्य राज्यों में बढ़ती शिकायतों का हिस्सा है – आफ्टर-सेल्स सर्विस में देरी, स्पेयर पार्ट्स की कमी, रिपेयर में लंबा समय। गोवा में ग्राहकों ने विरोध प्रदर्शन किए थे, जिसके बाद ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने कंपनी से बात की, नए रजिस्ट्रेशन रोक दिए और ग्राहकों को कंज्यूमर कोर्ट जाने की सलाह दी।

यह वारंट Ola Electric के लिए और चुनौती है, खासकर जब कंपनी हाल ही में लिस्टेड हुई है और उसके शेयरों पर असर पड़ सकता है (कुछ रिपोर्ट्स में शेयर गिरावट की बात कही गई)।

अभी तक Ola Electric या भाविश अग्रवाल की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मामला 23 फरवरी को फिर सुनवाई के लिए लिस्टेड है।

कंज्यूमर राइट्स के लिए यह एक बड़ा उदाहरण है – कंपनी के CEO को भी व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है अगर कंपनी ग्राहक की समस्या नहीं सुलझाती।

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