सोलर स्टॉर्म: सूरज में विशाल ‘काला गड्ढा’ खुला, 18 फरवरी तक पहुंच सकता है तूफान
सोलर स्टॉर्म: सूरज में विशाल ‘काला गड्ढा’ खुला, 18 फरवरी तक पहुंच सकता है तूफान
सूरज की सतह पर एक बड़ा कोरोनल होल (coronal hole) खुल गया है, जिसे लोग अक्सर “काला गड्ढा” कहकर डरते हैं। यह कोई असली ब्लैक होल नहीं है, बल्कि सूरज के कोरोना (बाहरी वातावरण) में एक ठंडा, कम घना क्षेत्र है जहां चुंबकीय क्षेत्र खुले हुए हैं। इससे तेज गति से सोलर विंड (solar wind) निकल रही है, जो सीधे पृथ्वी की ओर आ रही है।
क्या है यह ‘काला गड्ढा’?
यह ट्रांसइक्वेटोरियल कोरोनल होल है, जो सूरज के भूमध्य रेखा को पार करता हुआ C-आकार का है।
आकार: लगभग 400,000 मील (करीब 6.4 लाख किलोमीटर) चौड़ा – यानी कई पृथ्वी इसमें समा सकती हैं।
NASA/SDO और GOES-19 सैटेलाइट्स ने इसे 195 और 211 एंगस्ट्रॉम वेवलेंथ में कैद किया है, जहां यह गहरा काला दिखता है क्योंकि यहां प्लाज्मा कम गर्म और कम घना है।
यह क्षेत्र सूरज के दक्षिणी गोलार्ध से फैला हुआ है और पृथ्वी की ओर मुंह करके है।
कब और कैसे आएगा असर?
उच्च गति वाली सोलर विंड (700-800 km/s, यानी 1.6-1.8 मिलियन mph) 16-18 फरवरी 2026 के बीच पृथ्वी पहुंच रही है।
NOAA/SWPC ने G2 (मॉडरेट) जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म अलर्ट जारी किया है – 16 फरवरी को K-index 6 तक पहुंचा।
18 फरवरी तक यह प्रभाव जारी रह सकता है, लेकिन उसके बाद धीमा पड़ने की उम्मीद।
पहले से G1-G2 स्तर के स्टॉर्म चल रहे हैं, जिससे ऑरोरा (नॉर्दर्न लाइट्स) उत्तरी अमेरिका, कनाडा, यूरोप और उच्च अक्षांशों में दिख रही हैं।
क्या होगा असर पृथ्वी पर?
ऑरोरा: उत्तरी अमेरिका (अलास्का से न्यूयॉर्क तक), कनाडा, स्कॉटलैंड, नॉर्वे आदि में चमकदार हरे-लाल ऑरोरा दिख सकते हैं। भारत में संभावना कम, लेकिन मजबूत स्टॉर्म में उच्च हिमालय क्षेत्रों में संभव।
टेक्नोलॉजी: HF रेडियो में ब्लैकआउट, GPS/सैटेलाइट कम्युनिकेशन में मामूली डिस्टर्बेंस, पावर ग्रिड पर हल्का जोखिम (G2 स्तर पर ज्यादा नहीं)।
सामान्य प्रभाव: ज्यादातर मामूली – कोई बड़ा खतरा नहीं, लेकिन स्पेस वेदर मॉनिटरिंग जारी है।
हाल के बैकग्राउंड
सोलर साइकल 25 अभी भी एक्टिव है (2024 में मैक्सिमम पार किया)। फरवरी में ही कई X-क्लास फ्लेयर्स आए थे, लेकिन यह वाला मुख्य रूप से कोरोनल होल से है, CME से नहीं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में “भयानक तूफान” कहा जा रहा है, लेकिन वैज्ञानिक डेटा से G1-G2 स्तर का माइल्ड-मॉडरेट स्टॉर्म ही लगता है।
अगर आप उत्तर भारत (बैरेली) में हैं, तो रात में उत्तर दिशा में आसमान चेक करें – शायद हल्की ग्लो दिखे!
