पुलवामा हमले के 7 साल: NIA की जांच से जैश बेनकाब, भारत की नई जीरो टॉलरेंस रणनीति
14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए भयानक हमले को आज 7 साल हो गए। जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के फिदायीन हमलावर आदिल अहमद डार ने विस्फोटकों से भरी कार से CRPF काफिले पर हमला किया, जिसमें 40 जवान शहीद हुए। इस हमले ने देश को झकझोर दिया, लेकिन इसके बाद NIA की जांच और भारत की जीरो टॉलरेंस नीति ने आतंकवाद के खिलाफ एक नया दौर शुरू किया।
NIA ने जैश-ए-मोहम्मद को कैसे बेनकाब किया?
NIA ने हमले के तुरंत बाद 12 सदस्यीय टीम भेजी और 18 महीने की गहन जांच के बाद अगस्त 2020 में 13,500+ पेज की चार्जशीट दाखिल की। मुख्य निष्कर्ष:
मास्टरमाइंड: JeM चीफ मसूद अजहर, उनके भाई अब्दुल रऊफ असगर और अम्मार अल्वी (सभी पाकिस्तान में) सहित 19 आरोपी नामित। मसूद अजहर के भतीजे मोहम्मद उमर फारूक (†) मुख्य साजिशकर्ता थे, जो अप्रैल 2018 में घुसपैठ कर आए थे।
फॉरेंसिक सबूत: हमले में इस्तेमाल RDX, अमोनियम नाइट्रेट और नाइट्रोग्लिसरीन के अवशेषों का DNA और केमिकल एनालिसिस से ट्रेसिंग। FBI से मदद मिली—WhatsApp अकाउंट और विस्फोटकों की प्रकृति की जानकारी।
लॉजिस्टिक सपोर्ट: स्थानीय सहयोगी जैसे शाकिर बशीर मागरे, इंशा जान (महिला), बिलाल अहमद कुचे आदि ने आश्रय, मोबाइल फोन और वीडियो रिकॉर्डिंग में मदद की। उमर फारूक ने अफगानिस्तान में अल-कायदा कैंप में ट्रेनिंग ली थी।
पाकिस्तान का रोल: चार्जशीट में पाकिस्तान की सीधी भूमिका साबित—विस्फोटक पाकिस्तान से लाए गए, फाइनेंशियल ट्रेल और हैंडलर्स के कॉल रिकॉर्ड्स से। पाकिस्तान ने लेटर रोगेटरी पर कोई जवाब नहीं दिया।
परिणाम: 2021 तक मुख्य आरोपी सहित 6 अन्य मारे गए, 7 गिरफ्तार। JeM की ताकत काफी कमजोर हुई—कई कमांडर मारे गए, कैंप्स तबाह।
यह जांच “ब्लाइंड केस” से शुरू हुई थी, लेकिन फॉरेंसिक, डिजिटल और इंटेलिजेंस से watertight केस बनाया गया।
भारत ने आतंक पर नई रणनीति कैसे अपनाई?
पुलवामा के बाद भारत की क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म नीति में बड़ा बदलाव आया—जीरो टॉलरेंस और प्रोएक्टिव रिस्पॉन्स:
बालाकोट एयरस्ट्राइक (26 फरवरी 2019): पहली बार 1971 के बाद पाकिस्तानी इलाके में एयरस्ट्राइक। JeM के बालाकोट कैंप को निशाना बनाया—यह डिटरेंस का नया स्तर था।
नई डॉक्ट्रिन: अब आतंकी हमले को “एक्ट ऑफ वॉर” माना जाता है। आतंकवादियों और उनके बैकर्स (पाकिस्तान) को एक समान। स्टैंडऑफ वेपन्स और एयरपावर का इस्तेमाल बढ़ा।
2026 तक स्टेटस: घाटी में आतंकवाद सबसे कमजोर दौर में—कोई बड़ा हमला नहीं। आर्टिकल 370 हटाने, FATF ग्रे लिस्टिंग और सिक्योरिटी ऑपरेशन्स से स्थिरता बढ़ी। हाल के Pahalgam जैसे हमलों पर भी ऑपरेशन सिंदूर जैसी स्ट्राइक्स से रिस्पॉन्स दिया गया।
प्रभाव: पाकिस्तान को साफ संदेश—न्यूक्लियर ब्लैकमेल काम नहीं करेगा। शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं—यह भारत की नई कॉस्ट-इंपोजिशन स्ट्रैटेजी का आधार बना।
आज भी शहीदों की याद ताजा है, लेकिन उनकी शहादत ने भारत को मजबूत बनाया। NIA की जांच ने JeM को बेनकाब किया, और नई रणनीति ने आतंक के खिलाफ निर्णायक लड़ाई शुरू की।
