सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी के संविदा शिक्षकों को मिली राहत, मानदेय 7 हजार से बढ़कर 17 हजार रुपये
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: यूपी के संविदा शिक्षकों को मिली राहत, मानदेय 7 हजार से बढ़कर 17 हजार रुपये
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के हजारों संविदा शिक्षकों (अंशकालिक अनुदेशकों) को बड़ी राहत प्रदान की है। कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज करते हुए आदेश दिया है कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत इन शिक्षकों को अब 17,000 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा। यह फैसला 4 फरवरी 2026 को न्यायमूर्ति पंकज मिश्रा और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने सुनाया।
कोर्ट ने साफ कहा कि 2013 में तय 7,000 रुपये मासिक मानदेय को लंबे समय तक स्थायी रूप से लागू रखना अन्यायपूर्ण है और यह संविधान के अनुच्छेद 23 के तहत ‘बेगार’ (बंधुआ मजदूरी) के समान है। इन शिक्षकों ने वर्षों से कम वेतन पर काम किया, जबकि 2017-18 में प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) ने ही मानदेय 17,000 रुपये तय किया था, लेकिन राज्य सरकार ने इसे पूरी तरह लागू नहीं किया।
फैसले के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 से इन शिक्षकों को 17,000 रुपये मासिक के हिसाब से मानदेय का हक है। राज्य सरकार को 1 अप्रैल 2026 से नया मानदेय लागू करना होगा और बकाया राशि (अंतर की सैलरी) छह महीने के भीतर चुकानी होगी। साथ ही, अनुबंध की अवधि समाप्त होने के बाद भी इनकी सेवाएं स्थायी मानी जाएंगी और नौकरी नहीं जाएगी। यह फैसला लगभग 25,000 अनुदेशकों को प्रभावित करेगा, जो शारीरिक शिक्षा, कला और कार्य शिक्षा जैसे विषय पढ़ाते हैं।
शिक्षकों की ओर से लंबे समय से मानदेय बढ़ोतरी की मांग चल रही थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ यूपी सरकार ने अपील की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि शिक्षकों का कम वेतन उन्हें शोषण का शिकार बनाता है, जबकि वे महत्वपूर्ण शिक्षा कार्य कर रहे हैं।
यह निर्णय शिक्षा क्षेत्र में संविदा कर्मचारियों के अधिकारों को मजबूत करने वाला है और राज्य सरकारों के लिए एक सबक है कि ‘समान काम, समान वेतन’ के सिद्धांत का पालन जरूरी है। शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, उम्मीद है कि इससे अन्य राज्यों में भी समान मामलों पर असर पड़ेगा।
