उत्तराखंड के पौराणिक धार्मिक स्थलों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग तेज: बदरी-केदार समिति प्रस्ताव लाएगी, सीएम धामी बोले- संतों की राय पर सरकार चलेगी
उत्तराखंड के पौराणिक धार्मिक स्थलों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग तेज: बदरी-केदार समिति प्रस्ताव लाएगी, सीएम धामी बोले- संतों की राय पर सरकार चलेगी
उत्तराखंड, जिसे ‘देवभूमि’ के नाम से जाना जाता है, यहां हजारों पौराणिक और धार्मिक मंदिरों की मौजूदगी के कारण अब गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध की मांग जोर पकड़ रही है। हरिद्वार के हरकी पैड़ी से शुरू हुई यह बहस अब बदरीनाथ, केदारनाथ और अन्य चारधामों तक पहुंच गई है। बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने अपने अधीन आने वाले सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को वर्जित करने का प्रस्ताव तैयार किया है, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकार धार्मिक संगठनों और संत समाज की राय के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।
हरकी पैड़ी से शुरू हुई मांग
हरिद्वार में गंगा सभा ने हरकी पैड़ी और आसपास के घाटों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की मांग तेज की है। गंगा सभा ने ब्रिटिश काल के 1916 के नगर निगम बायलॉज का हवाला देते हुए दावा किया है कि यह नियम पहले से मौजूद है। हाल ही में हरकी पैड़ी क्षेत्र में ‘अहिंदू प्रवेश निषेध क्षेत्र’ के पोस्टर लगाए गए, जिससे विवाद बढ़ा। हिंदूवादी संगठनों का कहना है कि यह धार्मिक पवित्रता और परंपराओं की रक्षा के लिए जरूरी है। यह मांग अब पूरे प्रदेश के धार्मिक स्थलों तक फैल रही है।
BKTC का बड़ा कदम: बदरी-केदार समेत 47-48 मंदिरों में रोक
बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने घोषणा की है कि बदरीनाथ, केदारनाथ और बीकेटीसी के अधीन आने वाले करीब 47-48 मंदिरों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाएगा। यह फैसला आगामी बोर्ड बैठक में प्रस्ताव के रूप में लाया जाएगा और पारित होने की संभावना है। गंगोत्री धाम में भी मंदिर समिति ने पहले ही गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी है, जबकि यमुनोत्री पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। बीकेटीसी का तर्क है कि ये स्थान पौराणिक परंपराओं के अनुसार केवल हिंदुओं के लिए आरक्षित हैं और उनकी पवित्रता बनाए रखना जरूरी है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा, “प्रदेश के धार्मिक, पौराणिक स्थल और देवस्थान संत समाज, तीर्थ सभा, गंगा सभा, केदार सभा और बदरी-केदार मंदिर समिति जैसे संगठनों द्वारा संचालित होते हैं। इनकी राय और मत के अनुसार ही सरकार आगे बढ़ेगी। ये स्थान बहुत पौराणिक महत्व के हैं। पहले समय में बने कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है और उसी आधार पर निर्णय लिया जाएगा।” धामी ने जोर दिया कि सरकार इन स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
यह फैसला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या राज्यपाल जैसे गैर-हिंदू अधिकारी भी इन धामों में नहीं जा पाएंगे? वहीं, हिंदू संगठन इसे धार्मिक परंपराओं की रक्षा बताते हैं। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सिख अनुयायियों पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा, लेकिन स्पष्टता अभी बाकी है।
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा की तैयारियां जारी हैं, लेकिन यह मुद्दा धार्मिक भावनाओं और प्रशासनिक फैसलों के बीच संतुलन की चुनौती पेश कर रहा है। आगे की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पारित होने पर स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।
