उत्तराखंड

पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान, पीएम मोदी और राष्ट्रपति का धन्यवाद देते हुए कहा- ‘किसान के बेटे को इतना बड़ा सम्मान’

पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान, पीएम मोदी और राष्ट्रपति का धन्यवाद देते हुए कहा- ‘किसान के बेटे को इतना बड़ा सम्मान’

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा के बाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने पर खुशी की लहर है। कोश्यारी ने इस सम्मान को एक साधारण कार्यकर्ता के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान किसान के बेटे को मिला है, जिसकी उन्होंने कभी कामना भी नहीं की थी।

कोश्यारी का भावुक संदेश

भगत सिंह कोश्यारी ने गणतंत्र दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए कहा, “मुझे पद्म भूषण का सम्मान मिला है। इसके लिए मैं राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करता हूं। एक छोटे से कार्यकर्ता को यह सम्मान मिला है, जिसकी मैंने कभी कामना नहीं की। लेकिन प्रधानमंत्री ने इस पर सोचा और किसान के बेटे को इतना ऊंचा सम्मान दिया।” उन्होंने आगे कहा कि सभी लोग अपने क्षेत्र में पूरे मनोयोग से काम करें, तभी 2047 तक भारत जगतगुरु, संपन्न और नंबर वन देश बन सकता है। इसके लिए कर्तव्य का पालन जरूरी है।

सार्वजनिक सेवा में योगदान के लिए सम्मान

पद्म भूषण की घोषणा सार्वजनिक सेवा (Public Affairs) के क्षेत्र में उनके अनुकरणीय योगदान के लिए की गई है। कोश्यारी उत्तराखंड के दूसरे मुख्यमंत्री रहे, जहां उन्होंने राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे। पूर्व में लेक्चरर और पत्रकार के रूप में काम करने वाले कोश्यारी ने राजनीति में प्रवेश कर कई चुनौतियों का सामना किया, जिसमें 2 साल जेल भी शामिल है। उत्तराखंड में उन्हें ‘भगत दा’ के नाम से जाना जाता है।

महाराष्ट्र में विवाद

इस सम्मान से महाराष्ट्र में राजनीतिक बवाल मच गया है। कांग्रेस, एनसीपी (एसपी) और शिवसेना (उद्धव गुट) ने इसे महाराष्ट्र का अपमान बताया है। संजय राउत ने कहा कि कोश्यारी ने महाराष्ट्र में लोकतंत्र और संविधान को ‘मारा’ था, खासकर उद्धव ठाकरे सरकार गिराने में उनकी भूमिका का जिक्र करते हुए। विपक्ष का आरोप है कि यह फैसला महाराष्ट्र की अस्मिता पर हमला है। वहीं, बीजेपी और समर्थकों ने इसे उनके योगदान की मान्यता बताया है।

उत्तराखंड में खुशी की लहर

उत्तराखंड में, खासकर उनके गृह क्षेत्र कपकोट और आसपास के गांवों में खुशी का माहौल है। लोग इसे राज्य की राजनीतिक विरासत का सम्मान बता रहे हैं। कोश्यारी ने इस सम्मान को आरएसएस कार्यकर्ताओं और पूरे देश के साधारण कार्यकर्ताओं को समर्पित किया है।

यह पद्म भूषण 2026 की लिस्ट में शामिल अन्य नामों के साथ गणतंत्र दिवस परेड और समारोहों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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