गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक: श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने लिया सर्वसम्मति से फैसला, मुखबा में भी लागू होगा नियम
गंगोत्री धाम में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक: श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने लिया सर्वसम्मति से फैसला, मुखबा में भी लागू होगा नियम
उत्तराखंड के चार धामों में से एक गंगोत्री धाम अब गैर-हिंदुओं के लिए प्रतिबंधित हो गया है। श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने रविवार को हुई अपनी बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया कि गंगोत्री धाम और मां गंगा के शीतकालीन निवास मुखबा गांव में गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह फैसला धाम की पवित्रता और हिंदू आस्था को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
समिति चेयरमैन सुरेश सेमवाल का बयान
श्री गंगोत्री मंदिर समिति के चेयरमैन सुरेश सेमवाल ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा:
“गंगोत्री धाम हिंदू धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ है। यहां की पवित्रता और आस्था को किसी भी रूप में प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है कि गैर-हिंदुओं का धाम परिसर और मुखबा में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। यह नियम तत्काल प्रभाव से लागू होगा।”
फैसले का दायरा और लागू होने का समय
प्रतिबंध कहां लागू होगा?
गंगोत्री धाम का पूरा परिसर (मंदिर, परिक्रमा मार्ग, आसपास के क्षेत्र)
मां गंगा का शीतकालीन निवास मुखबा गांव (जहां सर्दियों में पूजा-अर्चना होती है)
कब से लागू?
धाम के कपाट फिलहाल बंद हैं। अगले सीजन (अप्रैल-मई 2026) में कपाट खुलने के साथ ही यह नियम लागू हो जाएगा। सर्दियों में मुखबा में पूजा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी यही नियम लागू रहेगा।
किन्हें प्रवेश नहीं मिलेगा?
गैर-हिंदू धर्मावलंबी (मुस्लिम, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध आदि) और विदेशी पर्यटक जो हिंदू नहीं हैं।
बद्रीनाथ-केदारनाथ में भी आने वाला है प्रस्ताव?
इस फैसले के बाद अब श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने भी बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा:
“बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम भी हिंदू धर्म के सबसे पवित्र स्थल हैं। हम आगामी बोर्ड बैठक में दोनों धामों और समिति के अधीन सभी मंदिरों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखेंगे। यह धामों की पवित्रता और आस्था की रक्षा के लिए जरूरी है।”
वर्तमान स्थिति
गंगोत्री धाम के कपाट अक्टूबर-नवंबर में बंद हो चुके हैं।
सर्दियों में पूजा-अर्चना मुखबा गांव में होती है, जहां भी अब गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित होगा।
चार धाम यात्रा अप्रैल-मई में शुरू होगी, तब तक नियम लागू हो चुके होंगे।
बद्रीनाथ-केदारनाथ में अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, लेकिन प्रस्ताव आने वाला है।
यह फैसला उत्तराखंड की धार्मिक राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है। कुछ लोग इसे आस्था की रक्षा बता रहे हैं, तो कुछ इसे भेदभावपूर्ण और पर्यटन पर असर डालने वाला मान रहे हैं। क्या आपको लगता है कि चार धामों में गैर-हिंदुओं पर प्रतिबंध लगना सही है? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
