सुप्रीम कोर्ट ने फांसी के विकल्प पर फैसला सुरक्षित रखा: घातक इंजेक्शन, गोली या इलेक्ट्रिक चेयर की मांग वाली याचिकाओं पर तीन सप्ताह में लिखित दलीलें मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने फांसी के विकल्प पर फैसला सुरक्षित रखा: घातक इंजेक्शन, गोली या इलेक्ट्रिक चेयर की मांग वाली याचिकाओं पर तीन सप्ताह में लिखित दलीलें मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिनमें मौत की सजा के दोषियों को फांसी देने के बजाय कम दर्दनाक और क्रूर तरीकों की मांग की गई है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों और केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल को तीन सप्ताह के भीतर लिखित दलीलें दाखिल करने का निर्देश दिया है।
याचिकाओं में उठाए गए मुख्य तर्क
फांसी देना क्रूर, अमानवीय और तकलीफदेह तरीका है।
मौत की सजा को अंजाम देने के लिए वैकल्पिक तरीके अपनाए जा सकते हैं, जैसे:
घातक इंजेक्शन (Lethal Injection)
गोली मारना (Firing Squad)
इलेक्ट्रिक चेयर
जहर का इंजेक्शन
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन विकल्पों से दोषी को कम दर्द और जल्दी मौत मिल सकती है, जो मानवाधिकारों के अनुरूप होगा।
लाल किला हमले के आतंकवादी मोहम्मद आरिफ की याचिका पर सुनवाई की सहमति
सुप्रीम कोर्ट ने 2000 के लाल किला हमले के मामले में मौत की सजा पाए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी मोहम्मद आरिफ (उर्फ अशफाक) की उपचारात्मक याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई है। इस हमले में सेना के तीन जवान शहीद हुए थे।
निचली अदालत ने अक्टूबर 2005 में मौत की सजा सुनाई थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने सितंबर 2007 में फैसला बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका 3 नवंबर 2022 को खारिज कर दी थी।
अब उपचारात्मक याचिका पर सुनवाई होगी।
केंद्र सरकार का पक्ष
अटॉर्नी जनरल ने दलील दी कि फांसी भारतीय कानून के तहत स्थापित और संवैधानिक तरीका है। उन्होंने कहा कि मौत की सजा को कम दर्दनाक बनाने के लिए पहले से ही दिशानिर्देश हैं, लेकिन इसे पूरी तरह बदलने की मांग पर विचार किया जाएगा।
यह मामला मौत की सजा के तरीके पर भारत में पहली बार इतने गंभीर स्तर पर बहस छेड़ रहा है। क्या फांसी का तरीका बदल सकता है, या सुप्रीम कोर्ट पुराने तरीके को ही बरकरार रखेगा? तीन सप्ताह बाद लिखित दलीलों के बाद फैसला आएगा।
