उत्तराखंड

सुखवंत सिंह सुसाइड केस: एसआईटी ने परिजनों के बयान दर्ज किए, जांच तेज; घटनास्थल पर पहुंची टीम, FSL को भेजे सबूत

सुखवंत सिंह सुसाइड केस: एसआईटी ने परिजनों के बयान दर्ज किए, जांच तेज; घटनास्थल पर पहुंची टीम, FSL को भेजे सबूत

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के काशीपुर निवासी किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या मामले में जांच तेज हो गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने शनिवार को हल्द्वानी के काठगोदाम स्थित होटल (घटनास्थल) का निरीक्षण किया और परिजनों के बयान दर्ज किए। एसआईटी प्रमुख आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भारणे की अगुवाई वाली टीम ने मौके से सबूत जुटाए, जिसमें फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) टीम ने भी हिस्सा लिया।

जांच का ताजा अपडेट

परिजनों के बयान: शनिवार शाम SIT ने सुखवंत सिंह के परिवार से मुलाकात की और उनके बयान दर्ज किए। परिवार ने आरोप लगाया कि सुखवंत सिंह ने 4 करोड़ रुपये की भूमि धोखाधड़ी में फंसने के बाद पुलिस से मदद मांगी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने पुलिस की लापरवाही और भू-माफियाओं के साथ सांठगांठ का दावा किया।

घटनास्थल निरीक्षण: टीम ने होटल रूम का दौरा किया, जहां सुखवंत सिंह ने 10 जनवरी की रात खुद को गोली मारी थी। FSL टीम ने जरूरी सबूत इकट्ठा किए। मृतक का मोबाइल फोन, फायरआर्म और ईमेल (जिसमें आरोप लगाए गए थे) FSL को भेजे गए हैं। तकनीकी टीम ईमेल और वीडियो की जांच कर रही है।

FIR ट्रांसफर: ITI थाने में दर्ज FIR अब काठगोदाम थाने में ट्रांसफर की जा रही है, ताकि जांच सुचारू हो।

एसआईटी का गठन और कार्रवाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर 5 सदस्यीय SIT गठित की गई थी, जिसमें शामिल हैं:

चेयरमैन: आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भारणे

अन्य सदस्य: एसपी चंपावत अजय गणपति, सीओ टनकपुर वंदना वर्मा, इंस्पेक्टर दिवान सिंह बिष्ट और एसआई मनीष खत्री।

पुलिस मुख्यालय ने जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए 12 पुलिसकर्मियों (ITI थाने और पैगा चौकी से) को निलंबित कर चमोली-रुद्रप्रयाग में ट्रांसफर किया। एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने कहा कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।

पृष्ठभूमि

सुखवंत सिंह ने मौत से पहले फेसबुक लाइव वीडियो और ईमेल में भू-माफियाओं और पुलिस अधिकारियों (ITI थाना प्रभारी कुंदन रौतेला, पैगा चौकी इंचार्ज प्रकाश बिष्ट आदि) पर प्रताड़ना, धमकी और कार्रवाई न करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि 4 करोड़ की जमीन ठगी में फंसने के बाद सालभर पुलिस ने मदद नहीं की।

मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा – कांग्रेस नेता हरीश रावत ने इसे ‘हत्या’ बताया और CBI जांच की मांग की। CM धामी ने परिवार से फोन पर बात की और न्याय का आश्वासन दिया। मजिस्ट्रेटी जांच भी चल रही है।

SIT ने कहा कि जांच तथ्यों, सबूतों और कानून के आधार पर हो रही है। परिवार को न्याय मिलेगा। क्या यह जांच दोषियों तक पहुंच पाएगी? कमेंट में बताएं।

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