उत्तराखंड

उत्तराखंड के जंगलों में सर्दियों में भी धधक रही आग: उत्तरकाशी के धरासू-मुखेम रेंज और नंदा देवी नेशनल पार्क में लगातार वनाग्नि, करोड़ों का नुकसान, वन्यजीवों पर खतरा

उत्तराखंड के जंगलों में सर्दियों में भी धधक रही आग: उत्तरकाशी के धरासू-मुखेम रेंज और नंदा देवी नेशनल पार्क में लगातार वनाग्नि, करोड़ों का नुकसान, वन्यजीवों पर खतरा

उत्तरकाशी/चमोली (उत्तराखंड), 14 जनवरी 2026: उत्तराखंड में इस साल असामान्य रूप से शुष्क मौसम और बर्फबारी-बारिश न होने से शीतकाल में ही जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ गई हैं। सामान्यतः फरवरी-जून में होने वाली वनाग्नि अब जनवरी में ही भयावह रूप ले रही है। उत्तरकाशी जिले के धरासू और मुखेम रेंज के जंगलों में लगातार आग लग रही है, जबकि नंदा देवी नेशनल पार्क (UNESCO विश्व धरोहर) में 5 दिनों से आग भड़क रही है। इससे अमूल्य वन संपदा, वन्यजीवों का आवास और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है—धुएं से वायु प्रदूषण बढ़ा है और दृश्यता कम हो गई है।

उत्तरकाशी में स्थिति गंभीर

मुखेम रेंज (मनेरा क्षेत्र) और धरासू रेंज के जंगलों में आग से दिनभर धुआं उठ रहा है।

लाखों रुपये की वन संपदा (चीड़, बांज, बुरांश आदि) जल चुकी है।

वन्यजीवों (हिमालयी तेंदुआ, कस्तूरी मृग, भालू आदि) पर खतरा मंडरा रहा है—आग से उनका भोजन-पानी प्रभावित हो रहा है।

उच्च हिमालयी क्षेत्रों तक आग पहुंच रही है, जहां पहुंचना मुश्किल है।

वन विभाग की टीम दिन-रात प्रयास कर रही है, लेकिन संसाधनों की कमी और शुष्क मौसम से आग बुझाना चुनौतीपूर्ण।

प्रभागीय वनाधिकारी देवी प्रसाद बलूनी ने बताया:

“जंगलों में आग लगने के कारणों का पता लगाया जा रहा है। कुछ जगहों पर कंट्रोल बर्निंग चल रही है। विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है—टीमें दोपहर और रात में आग बुझाने का प्रयास कर रही हैं। जल्द ही स्थिति नियंत्रण में आ जाएगी।”

नंदा देवी नेशनल पार्क में आग का खतरा

फूलों की घाटी रेंज (वैली ऑफ फ्लावर्स) के पास पैनखंडा क्षेत्र में 9 जनवरी से आग लगी है—अब 5वें दिन भी जारी।

आग ऊंचाई 11,500-13,000 फीट पर फैली है—दुर्गम इलाका होने से पहुंच मुश्किल।

वन विभाग ने भारतीय वायु सेना (IAF) से हेलीकॉप्टर मदद मांगी है—बंबी बकेट से पानी डालकर आग बुझाने की योजना।

खराब मौसम से हेलीकॉप्टर उड़ान प्रभावित हो रही है।

नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व (UNESCO विश्व धरोहर) को करोड़ों का नुकसान—दुर्लभ फूल, जड़ी-बूटियां और वन्यजीव प्रभावित।

क्यों बढ़ रही हैं आग की घटनाएं?

दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में अब तक कोई बारिश/बर्फबारी नहीं हुई—जंगलों में नमी कम।

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) के अनुसार, नवंबर से अब तक हजारों फायर अलर्ट—उत्तराखंड देश में सबसे ज्यादा।

मानवीय कारण (कंट्रोल बर्निंग, लापरवाही) भी जिम्मेदार।

शीतकाल में आग वर्षा से ही बुझती है, लेकिन सूखे से सिलसिला थम नहीं रहा।

वन विभाग की चुनौतियां

संसाधनों की कमी—पर्याप्त फायर वाचर, उपकरण नहीं।

दुर्गम इलाकों में पहुंच मुश्किल।

विभाग ने स्थानीय समितियों और ग्रामीणों से मदद ली है, लेकिन स्थिति नियंत्रण में लाने में समय लग रहा है।

उत्तराखंड के जंगलों में यह संकट पारिस्थितिकी संतुलन, जैव विविधता और पर्यटन को प्रभावित कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और शुष्क मौसम से ऐसे हादसे बढ़ेंगे। वन विभाग अलर्ट है, लेकिन बारिश/बर्फबारी की जरूरत है। क्या आपको लगता है कि सरकार को वनाग्नि रोकथाम के लिए और संसाधन बढ़ाने चाहिए? कमेंट में बताएं।

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