उत्तराखंड में कांग्रेस का हमला: प्रीतम सिंह बोले- BJP राज में जनता की सुनवाई नहीं, सुखवंत सिंह की आत्महत्या और अंकिता हत्याकांड पर घेरा सरकार
उत्तराखंड में कांग्रेस का हमला: प्रीतम सिंह बोले- BJP राज में जनता की सुनवाई नहीं, सुखवंत सिंह की आत्महत्या और अंकिता हत्याकांड पर घेरा सरकार
उत्तराखंड कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने आज लक्सर पहुंचकर राज्य की भाजपा सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में आम आदमी की शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही, जिससे लोग परेशान हैं। ताजा उदाहरण देते हुए उन्होंने काशीपुर के किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या का जिक्र किया, जो शिकायत पर कार्रवाई न होने से इतना हताश हो गया कि जान दे दी।
बसेड़ी गांव में BJP पर बरसे प्रीतम
बसेड़ी गांव में कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने कहा कि भाजपा राज में जनता की कोई सुनवाई नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर अंकिता भंडारी हत्याकांड में गलत बयानी का आरोप लगाया। प्रीतम ने बताया कि अंकिता के माता-पिता हत्या के बाद से ही सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने तीन साल तक वीआईपी को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। जनता के गुस्से और कांग्रेस के संघर्ष के बाद आखिरकार सरकार को सीबीआई जांच की सिफारिश करनी पड़ी।
सुखवंत सिंह की आत्महत्या का मुद्दा उठाया
प्रीतम सिंह ने सुखवंत सिंह की मौत को सरकार की नाकामी का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि शिकायत पर कार्रवाई न होने से परेशान किसान ने आत्महत्या कर ली, जो भाजपा सरकार में जनता की हालत दर्शाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंकिता हत्याकांड में सरकार ने तीन साल तक वीआईपी को बचाने की कोशिश की।
अमीर-अमीर, गरीब-गरीब हो रहा: प्रीतम का आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा सरकार में अमीर और अमीर होता जा रहा है, जबकि गरीब और गरीब। सरकार को जनता के दुख-दर्द से कोई मतलब नहीं। उन्होंने मनरेगा का नाम बदलने पर भी सवाल उठाया। प्रीतम ने बताया कि कांग्रेस शासन में महात्मा गांधी के नाम से योजना चलाई गई थी, जहां 90% भुगतान केंद्र करता था और 10% राज्य। अब 60% केंद्र और 40% राज्य का बोझ है, जिससे राज्य सरकार भुगतान नहीं कर पा रही। इससे ग्रामीण गरीबों को नुकसान हो रहा है।
प्रीतम सिंह की यह यात्रा और बयान आगामी चुनावों से पहले कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा लगते हैं, जहां वे सरकार की कथित नाकामियों को उजागर कर रहे हैं। क्या इससे उत्तराखंड की राजनीति में कोई बदलाव आएगा? अपडेट्स का इंतजार रहेगा।
