मकर संक्रांति पर खुले आदिबदरी मंदिर के कपाट: 2 क्विंटल फूलों से सजा बदरीनारायण धाम, शुरू हुआ 7 दिवसीय महाभिषेक समारोह
मकर संक्रांति पर खुले आदिबदरी मंदिर के कपाट: 2 क्विंटल फूलों से सजा बदरीनारायण धाम, शुरू हुआ 7 दिवसीय महाभिषेक समारोह
चमोली (उत्तराखंड), 14 जनवरी 2026: मकर संक्रांति के पावन अवसर पर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित आदिबदरी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। पंचबदरी की प्रथम धाम माने जाने वाले इस पवित्र स्थल पर आज ब्रह्म मुहूर्त में विशेष पूजा-अर्चना के बाद दर्शन शुरू हो गए। मंदिर को दो क्विंटल फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है, जिससे पूरा परिसर दिव्य और आकर्षक नजर आ रहा है।
कपाट खुलने की पूरी प्रक्रिया
समय: बुधवार सुबह 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त में कपाट खोले गए।
पूजा: पुजारी चक्रधर प्रसाद थपलियाल ने भगवान बदरीनारायण का अभिषेक किया, भोग लगाया और पंच ज्वाला आरती संपन्न की।
समारोह: कपाट खुलने के साथ ही सात दिवसीय महाभिषेक समारोह का शुभारंभ हो गया। इस दौरान रोजाना विशेष पूजा, हवन और भजन-कीर्तन होंगे।
आदिबदरी मंदिर की खासियत
आदिबदरी को पंचबदरी (पांच बदरी धामों) में प्रथम स्थान प्राप्त है। यहां भगवान विष्णु के बदरीनारायण रूप की पूजा होती है। मंदिर के कपाट पौष मास में एक महीने के लिए बंद रहते हैं और मकर संक्रांति पर फिर खुलते हैं। यह परंपरा हजारों वर्ष पुरानी है और उत्तराखंड की धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
श्रद्धालुओं की भीड़
कपाट खुलने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गईं। मंदिर समिति के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद बहुगुणा ने बताया कि इस वर्ष फूलों की सजावट और पूजा में विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने सभी भक्तों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह अवसर सूर्य के उत्तरायण होने और नए संकल्पों का प्रतीक है।
कैसे पहुंचें आदिबदरी?
नजदीकी शहर: जोशीमठ (करीब 25-30 किमी)
रूट: हरिद्वार → ऋषिकेश → देवप्रयाग → श्रीनगर → पौड़ी → कर्णप्रयाग → नंदप्रयाग → चमोली → जोशीमठ → आदिबदरी
सर्वश्रेष्ठ समय: मकर संक्रांति से लेकर फाल्गुन तक दर्शन सुगम रहते हैं।
आदिबदरी में आज का यह पावन दिन हजारों भक्तों के लिए आस्था और भक्ति का प्रतीक बन गया है। मकर संक्रांति के इस शुभ अवसर पर सभी को ढेर सारी शुभकामनाएं—नया साल, नई ऊर्जा और सुख-समृद्धि मिले!
क्या आपने कभी आदिबदरी के दर्शन किए हैं? या आज उत्तराखंड में संक्रांति कैसे मना रहे हैं? कमेंट में जरूर बताएं।
