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AI की रेस में हारा Apple? Google से मिलाया हाथ, Gemini से चलेगी नई Siri!

AI की रेस में हारा Apple? Google से मिलाया हाथ, Gemini से चलेगी नई Siri!

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दौड़ में Apple अब तक पीछे चल रहा था, लेकिन अब कंपनी ने बड़ा कदम उठाया है। Apple और Google ने मल्टी-ईयर पार्टनरशिप की घोषणा की है, जिसमें Google के Gemini AI मॉडल और क्लाउड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल Apple के फाउंडेशन मॉडल्स के लिए किया जाएगा। इससे Apple की Apple Intelligence फीचर्स और सबसे बड़ा अपग्रेड – नई, ज्यादा पर्सनलाइज्ड Siri – 2026 में लॉन्च होगी।

यह खबर 12 जनवरी को दोनों कंपनियों के जॉइंट स्टेटमेंट से आई, जिसमें कहा गया: “Apple ने सावधानी से मूल्यांकन के बाद पाया कि Google की AI टेक्नोलॉजी Apple Foundation Models के लिए सबसे सक्षम आधार प्रदान करती है। हम यूजर्स के लिए नए इनोवेटिव एक्सपीरियंस लेकर उत्साहित हैं।”

क्यों हारा Apple AI रेस में?

Apple ने 2024 में Apple Intelligence लॉन्च किया था, लेकिन Siri का बड़ा अपग्रेड (जो 2025 में आना था) डिले हो गया और अब 2026 में आएगा।

कंपनी ने इन-हाउस AI डेवलपमेंट में देरी, एग्जीक्यूटिव चेंजेस और शुरुआती फीचर्स पर मिली-जुली प्रतिक्रिया का सामना किया।

Google, OpenAI और अन्य ने Gemini, ChatGPT जैसे मॉडल्स से आगे निकल गए, जबकि Apple प्राइवेसी पर फोकस करते हुए धीमा रहा।

एक्सपर्ट्स (जैसे Wedbush के Dan Ives) कहते हैं कि Apple को अब Google से पार्टनरशिप करनी पड़ी क्योंकि इन-हाउस AI में स्पीड और कैपेबिलिटी की कमी थी।

डील की मुख्य बातें

Gemini मॉडल्स Apple के फाउंडेशन मॉडल्स का आधार बनेंगे, जो Siri और अन्य Apple Intelligence फीचर्स को पावर देंगे।

डील नॉन-एक्सक्लूसिव है (Google ने कन्फर्म किया)।

रिपोर्ट्स के मुताबिक Apple Google को हर साल लगभग $1 बिलियन (करीब ₹8,300 करोड़) देगा।

प्राइवेसी बरकरार रहेगी: Apple Intelligence डिवाइस पर या प्राइवेट क्लाउड कंप्यूट पर चलेगा, यूजर डेटा Google को नहीं जाएगा।

पहले से Apple OpenAI के साथ ChatGPT इंटीग्रेशन करता है (कॉम्प्लिकेटेड क्वेरी के लिए), लेकिन नई डील से Gemini मुख्य बनेगा। OpenAI का रोल अब साइड फीचर जैसा हो सकता है।

Google के लिए बड़ा जीत

यह डील Google के लिए मेजर वैलिडेशन है – Alphabet की वैल्यूएशन $4 ट्रिलियन पार कर गई।

Gemini अब iPhone के 2 बिलियन+ डिवाइसेस पर पहुंचेगा, Samsung के Galaxy AI के बाद।

Google पहले से Apple को डिफॉल्ट सर्च इंजन के लिए अरबों डॉलर देता है, अब AI में भी मजबूत हो गया।

क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट्स?

कुछ का मानना है कि Apple ने AI रेस “हार” ली और अब Google पर निर्भर हो गया।

लेकिन Apple कहता है कि यह पार्टनरशिप है, न कि सरेंडर – कंपनी अपना AI काम जारी रखेगी।

Elon Musk ने इसे “अनरिजनेबल कंसंट्रेशन ऑफ पावर” बताया, क्योंकि Google के पास Android, Chrome और अब Apple का AI भी होगा।

यह पार्टनरशिप टेक वर्ल्ड में बड़ा टर्निंग पॉइंट है – Apple की प्राइवेसी और Google की AI पावर का कॉम्बिनेशन यूजर्स को बेहतर Siri देगा। क्या आपको लगता है Apple ने सही कदम उठाया या OpenAI से बेहतर पार्टनर चुनना चाहिए था? कमेंट्स में बताएं!

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