कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी लीडर से चीनी राजदूत की मुलाकात: आखिर क्या है माजरा ?
कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी लीडर से चीनी राजदूत की मुलाकात: आखिर क्या है माजरा ?
बांग्लादेश की सियासत में नया ट्विस्ट! 12 जनवरी 2026 को चीनी राजदूत याओ वेन ने ढाका में जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान से सौजन्य मुलाकात की। ये मुलाकात जमात के सेंट्रल ऑफिस (बाशुंधरा) में हुई, जहां दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों, शिक्षा, संस्कृति, विकास और आपसी सहयोग पर चर्चा की। चीनी राजदूत ने जमात को “सुनियोजित राजनीतिक दल” बताया और बांग्लादेश को “सुंदर देश” कहकर तारीफ की। जमात ने भी चीन की विकास साझेदारी की सराहना की और वन-चाइना पॉलिसी का समर्थन दोहराया।
यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को आम चुनाव होने हैं। शेख हसीना की सरकार ने जमात को कट्टरपंथी और आतंकी प्रवृत्ति वाला संगठन बताकर 2013 में प्रतिबंध लगाया था (1971 के युद्ध अपराधों के आरोपों के चलते), लेकिन मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने अगस्त 2024 में ये प्रतिबंध हटा लिया। अब जमात मुख्यधारा में लौट आई है और चुनाव में मजबूत दावेदार बन रही है — ओपिनियन पोल्स में वो BNP के ठीक पीछे (29% vs 33%) दिख रही है।
बीजिंग की चाल क्या है?
चीन की रणनीति: बीजिंग बांग्लादेश में सभी राजनीतिक दलों से संपर्क बढ़ा रहा है — पहले BNP, NCP और अब जमात से। 2024-2025 में कई मुलाकातें हुईं (सितंबर 2024 में भी याओ वेन ने जमात से मिले थे)। विश्लेषकों का मानना है कि चीन 2026 चुनावों में प्रभाव बढ़ाना चाहता है, ताकि यूनुस सरकार के बाद भी चीन-समर्थक ताकतें सत्ता में रहें।
भारत के लिए चिंता: जमात ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान-समर्थक और भारत-विरोधी रही है। अगर जमात सत्ता में आई या गठबंधन में शामिल हुई, तो बांग्लादेश में इस्लामी प्रभाव बढ़ सकता है, जो भारत की सुरक्षा (सीमा, रोहिंग्या, आतंकवाद) के लिए खतरा है। चीन की ये पहुंच “बंगाली पाकिस्तान” जैसी स्थिति पैदा कर सकती है।
क्षेत्रीय खेल: चीन BRI और इकोनॉमिक इन्वेस्टमेंट के जरिए बांग्लादेश में गहरा पैठ बना रहा है। जमात जैसे संगठन से जुड़कर वो भारत-विरोधी ताकतों को मजबूत कर सकता है, जबकि पाकिस्तान भी जमात के साथ सक्रिय है।
ये मुलाकात “सौजन्य” बताई जा रही है, लेकिन टाइमिंग और बैकग्राउंड से साफ है कि बीजिंग चुनावी राजनीति में अपनी पोजिशन मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। बांग्लादेश के चुनाव नजदीक हैं — क्या जमात बड़ा उलटफेर करेगी? या ये सिर्फ कूटनीतिक कदम है?
आप क्या सोचते हैं — चीन की ये चाल भारत के लिए कितनी खतरनाक है? कमेंट में बताएं!
