राजनीति

तेलंगाना में दो बच्चों का नियम खत्म: अब निकाय चुनावों में कोई पाबंदी नहीं, विधानसभा ने पारित किया संशोधन विधेयक

तेलंगाना में दो बच्चों का नियम खत्म: अब निकाय चुनावों में कोई पाबंदी नहीं, विधानसभा ने पारित किया संशोधन विधेयक

हैदराबाद, 3 जनवरी 2026: तेलंगाना विधानसभा ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए स्थानीय निकाय चुनावों (पंचायत और नगर निकाय) में दो बच्चों की पाबंदी को पूरी तरह समाप्त कर दिया। सदन ने तेलंगाना पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी, जिससे अब दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्ति भी सरपंच, वार्ड मेंबर, MPTC या ZPTC जैसे पदों के लिए चुनाव लड़ सकेंगे। यह बदलाव पहले जारी अध्यादेश की जगह लेगा।

फैसले की मुख्य वजह:

पंचायत राज मंत्री दानसारी अनसूया सीताक्का ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह नियम 1994 में अविभाजित आंध्र प्रदेश में जनसंख्या विस्फोट को नियंत्रित करने के लिए लागू किया गया था। तब खाद्य सुरक्षा, बेरोजगारी और गरीबी जैसी चुनौतियां थीं।

लेकिन 30 साल बाद स्थितियां बदल गई हैं। राज्य में ग्रामीण इलाकों में फर्टिलिटी रेट 1.7 हो गया है, जो रिप्लेसमेंट रेट (2.1) से कम है।

मंत्री ने चेतावनी दी कि अगर फर्टिलिटी रेट इसी तरह गिरता रहा, तो आने वाली पीढ़ियों के हितों पर बुरा असर पड़ेगा और जनसंख्या में तेज गिरावट आएगी।

पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों की राय और स्थानीय निकाय चुनाव कराने की जरूरत को ध्यान में रखकर यह संशोधन लाया गया।

पृष्ठभूमि:

पहले तेलंगाना पंचायत राज एक्ट, 2018 में यह प्रावधान था कि दो से ज्यादा बच्चों वाले व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकते।

शहरी निकायों में यह नियम पहले ही हटा दिया गया था।

कई दक्षिणी राज्य (जैसे आंध्र प्रदेश) भी जनसंख्या गिरावट और आने वाले परिसीमन (2026 में संभावित) को देखते हुए ऐसे कदम उठा रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि घटती आबादी से कार्यबल और आर्थिक विकास पर असर पड़ सकता है।

प्रतिक्रियाएं:

कांग्रेस सरकार का यह फैसला राज्य की लंबी अवधि की जनसांख्यिकीय चुनौतियों से निपटने की दिशा में देखा जा रहा है।

विपक्ष ने अभी कोई बड़ी प्रतिक्रिया नहीं दी, लेकिन कुछ ने इसे जनसंख्या नीति में यू-टर्न बताया।

स्थानीय नेताओं और पंचायत प्रतिनिधियों ने फैसले का स्वागत किया है।

यह संशोधन तेलंगाना में ग्रामीण और शहरी दोनों निकाय चुनावों को अधिक समावेशी बनाएगा। अब आगामी पंचायत चुनावों में ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतर सकेंगे। स्थिति पर नजरें टिकी हैं कि यह अन्य राज्यों को प्रभावित करेगा या नहीं।

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