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‘संघ कोई अर्धसैनिक संगठन नहीं, BJP से जोड़कर देखना बड़ी भूल’: भोपाल में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

‘संघ कोई अर्धसैनिक संगठन नहीं, BJP से जोड़कर देखना बड़ी भूल’: भोपाल में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

भोपाल, 3 जनवरी 2026: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वर्दी, पथ संचलन और दंड अभ्यास के बावजूद संघ कोई अर्धसैनिक (पैरामिलिट्री) संगठन नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) या विद्या भारती जैसे संबद्ध संगठनों के नजरिए से संघ को समझने की कोशिश करना एक बड़ी गलती होगी। भागवत भोपाल में संघ के शताब्दी वर्ष के तहत आयोजित ‘प्रबुद्ध जन सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे।

मुख्य बयान:

भागवत ने कहा, “हम वर्दी पहनते हैं, पथ संचलन करते हैं और दंड अभ्यास करते हैं। लेकिन अगर कोई इसे अर्धसैनिक संगठन समझता है, तो यह भूल होगी। संघ एक अनोखा संगठन है, जिसे समझना आसान नहीं है।”

उन्होंने आगे जोड़ा, “अगर आप भाजपा को देखकर संघ को समझना चाहते हैं, तो यह बहुत बड़ी गलती होगी। यही गलती विद्या भारती या अन्य संबद्ध संगठनों से संघ को जोड़कर देखने में भी होगी।”

संघ का उद्देश्य समाज को एकजुट करना और उसमें आवश्यक गुण व सद्गुण विकसित करना है, ताकि भारत फिर कभी किसी विदेशी शक्ति के अधीन न हो।

झूठे नैरेटिव पर हमला:

भागवत ने कहा कि संघ के खिलाफ एक “झूठा नैरेटिव” गढ़ा जा रहा है। लोग गहराई में जाकर सही जानकारी नहीं लेते, बल्कि विकिपीडिया जैसे सतही स्रोतों पर निर्भर रहते हैं।

उन्होंने लोगों को संघ की शाखा में आकर संगठन को समझने की अपील की। “चीनी की मिठास बताने से बेहतर है कि एक चम्मच चख लें।”

ऐतिहासिक संदर्भ:

भागवत ने भारत के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि अंग्रेज पहले विदेशी आक्रमणकारी नहीं थे। बार-बार दूर देशों से कम संख्या में लोग आकर हमें हराते रहे, क्योंकि समाज में एकता और गुणों की कमी थी।

संघ की स्थापना किसी प्रतिक्रिया या विरोध के रूप में नहीं हुई, बल्कि समाज निर्माण के लिए।

राजनीतिक निहितार्थ:

RSS को आमतौर पर जनसंघ और उसके उत्तराधिकारी BJP का वैचारिक मूल माना जाता है। भागवत का यह बयान संघ और BJP के बीच दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संघ स्वयंसेवकों को विकसित करता है, लेकिन BJP, VHP या विद्या भारती जैसे संगठन स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और संघ उनका ‘रिमोट कंट्रोल’ नहीं है।

यह संबोधन संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान भागवत के देशव्यापी दौरे का हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान संघ की छवि को स्पष्ट करने और गलतफहमियां दूर करने की कोशिश है। कार्यक्रम में युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों की बड़ी संख्या मौजूद थी।

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