राजनीति

BMC चुनाव से पहले मातोश्री में बवाल: उद्धव पर ‘गद्दार’ के नारे, टिकट न मिलने से नाराज शिवसैनिकों का विद्रोह

BMC चुनाव से पहले मातोश्री में बवाल: उद्धव पर ‘गद्दार’ के नारे, टिकट न मिलने से नाराज शिवसैनिकों का विद्रोह

मुंबई, 30 दिसंबर 2025: ब्रिहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव का बिगुल बजते ही महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है। शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के बांद्रा स्थित निवास ‘मातोश्री’ के बाहर मंगलवार को पार्टी के ही कार्यकर्ताओं ने जोरदार हंगामा किया। टिकट वितरण में खुद को नजरअंदाज किए जाने से नाराज शिवसैनिकों ने उद्धव ठाकरे को ‘गद्दार’ कहकर नारे लगाए और पोस्टर फाड़े। यह घटना पार्टी के आंतरिक असंतोष को पूरी तरह उजागर कर रही है।

क्या हुआ मातोश्री के बाहर?

सूत्रों के अनुसार, दर्जनों कार्यकर्ता दोपहर में मातोश्री के गेट के सामने जमा हुए। उन्होंने “उद्धव ठाकरे गद्दार है”, “बालासाहेब की शिवसेना वापस लाओ” और “टिकट बेचे जा रहे हैं” जैसे नारे लगाए। कुछ ने उद्धव की तस्वीर वाले पोस्टर फाड़े और काले झंडे दिखाए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि BMC चुनाव के लिए टिकट बाहरी लोगों और पैसे वालों को दिए जा रहे हैं, जबकि पुराने dedicated शिवसैनिकों को दरकिनार किया जा रहा है। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर स्थिति संभाली और कार्यकर्ताओं को तितर-बितर किया। कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।

असंतोष की मुख्य वजहें

टिकट वितरण में मनमानी: उद्धव गुट में कई पुराने नेता और शाखा प्रमुखों को टिकट नहीं मिला। कई सीटों पर राज ठाकरे की MNS से गठबंधन के तहत समायोजन की चर्चा से भी नाराजगी।

राज ठाकरे गठबंधन का विरोध: कुछ कट्टर शिवसैनिकों का मानना है कि राज ठाकरे से हाथ मिलाना बालासाहेब की विचारधारा के खिलाफ है। वे इसे “सत्ता की लालच” बता रहे हैं।

पार्टी में गुटबाजी: संजय राउत और आदित्य ठाकरे गुट के बीच कथित टकराव भी सामने आ रहा है। कई कार्यकर्ता मिलिंद देवड़ा या अन्य बाहरी नेताओं को तरजीह देने से खफा हैं।

उद्धव गुट की प्रतिक्रिया

शिवसेना (UBT) प्रवक्ता आनंदराव अडसुल ने इसे “शिंदे गुट की साजिश” बताया। उन्होंने कहा, “ये लोग पैसे देकर हमारे कार्यकर्ताओं को भड़का रहे हैं। असली शिवसैनिक उद्धवजी के साथ हैं।” आदित्य ठाकरे ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मातोश्री शिवसैनिकों का मंदिर है। ऐसे हंगामे से हम डरने वाले नहीं।”

BMC के 227 वार्डों में चुनाव फरवरी 2026 में होने हैं। उद्धव गुट के लिए मुंबई शिवसेना का गढ़ रही है, लेकिन यह विद्रोह अगर बढ़ा तो महायुति (शिंदे-बीजेपी) को फायदा हो सकता है। क्या उद्धव इस आंतरिक संकट को संभाल पाएंगे? आने वाले दिन बताएंगे।

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