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कम कमाई, दिन-रात मेहनत: न्यू ईयर ईव पर डिलीवरी बॉयज की हड़ताल, गिग वर्कर्स का असली दर्द

कम कमाई, दिन-रात मेहनत: न्यू ईयर ईव पर डिलीवरी बॉयज की हड़ताल, गिग वर्कर्स का असली दर्द

नई दिल्ली/मुंबई, 30 दिसंबर 2025: नए साल की पार्टी प्लान कर रहे हैं तो सावधान! स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट, जेप्टो, अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स की डिलीवरी सेवाएं 31 दिसंबर को ठप हो सकती हैं। गिग वर्कर्स ने क्रिसमस (25 दिसंबर) के बाद अब न्यू ईयर ईव पर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) और तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन (TGPWU) के नेतृत्व में लाखों डिलीवरी पार्टनर्स सड़कों पर उतरेंगे।

असली हाल क्या है?

कम कमाई: एक सर्वे के मुताबिक, 64% डिलीवरी बॉयज रोजाना 600 रुपये से कम कमाते हैं। प्रति ऑर्डर 16-25 रुपये मिलते हैं, जबकि ईंधन, बाइक मेंटेनेंस और अन्य खर्च काटने के बाद महीने में 10-15 हजार भी मुश्किल से बचते हैं। कंपनियां इंसेंटिव और बोनस मनमाने ढंग से घटा रही हैं।

दिन-रात मेहनत: 75% से ज्यादा वर्कर्स रोज 10-12 घंटे काम करते हैं। कई तो 1-3 घंटे इंतजार करते हैं अगले ऑर्डर का। कोहरे में रात 11 बजे के बाद डिलीवरी मजबूरी बन जाती है।

असुरक्षा: 10 मिनट डिलीवरी मॉडल की वजह से एक्सीडेंट का खतरा बढ़ा। एल्गोरिदम कंट्रोल से ID ब्लॉकिंग, बिना वजह पेनल्टी और कोई अपील सिस्टम नहीं।

सोशल सिक्योरिटी की कमी: नौकरी की गारंटी नहीं, बीमा अपर्याप्त, कोई पेंशन या वेलफेयर स्कीम नहीं। नवंबर 2025 में लागू सोशल सिक्योरिटी कोड के बावजूद इम्प्लीमेंटेशन कमजोर।

क्रिसमस हड़ताल में 40,000 से ज्यादा वर्कर्स शामिल हुए, जिससे गुरुग्राम जैसे शहरों में 50-60% डिलीवरी प्रभावित हुई। यूनियन नेता शेख सलाउद्दीन कहते हैं, “हम एल्गोरिदम के गुलाम नहीं। न्याय, गरिमा और सुरक्षा चाहिए।”

कंपनियां थर्ड-पार्टी एजेंसियां या इनएक्टिव ID एक्टिवेट कर हड़ताल तोड़ने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन वर्कर्स दृढ़ हैं। ग्राहकों को देरी या कैंसिलेशन का सामना करना पड़ सकता है। क्या यह हड़ताल गिग इकोनॉमी में बदलाव लाएगी? आने वाला समय बताएगा।

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