सोना या चांदी: 2026 में कौन देगा बंपर रिटर्न? विशेषज्ञों की राय से समझिए
सोना या चांदी: 2026 में कौन देगा बंपर रिटर्न? विशेषज्ञों की राय से समझिए
नई दिल्ली: साल 2025 में सोने और चांदी ने निवेशकों को जबरदस्त मुनाफा दिया। सोना करीब 60-70% चढ़ा, जबकि चांदी ने 120-140% तक की छलांग लगाई। अब सभी की नजर 2026 पर है—क्या यह तेजी जारी रहेगी और दोनों में से कौन बेहतर प्रदर्शन करेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में दोनों कीमती धातुओं की कीमतें ऊपर रहेंगी, लेकिन चांदी में प्रतिशत के हिसाब से ज्यादा कमाई की संभावना है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 2026 के अंत तक 4,500 से 5,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। बैंक ऑफ अमेरिका, जेपी मॉर्गन और सोसाइते जनरल जैसे बड़े संस्थान 5,000 डॉलर का अनुमान लगा रहे हैं। भारत में इससे सोना 1.50 से 1.65 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।
चांदी की बात करें तो विशेषज्ञ ज्यादा उत्साहित हैं। 2025 में इंडस्ट्रियल डिमांड (सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स, EV) और सप्लाई की कमी से चांदी रॉकेट की तरह उड़ी। 2026 में यह 56-65 डॉलर औंस के औसत से ऊपर 70-85 डॉलर या इससे ज्यादा तक जा सकती है। कुछ एक्सपर्ट तो 100 डॉलर तक का अनुमान दे रहे हैं। भारत में चांदी 2.30 से 2.50 लाख रुपये प्रति किलो या इससे ऊपर पहुंच सकती है, कुछ अनुमानों में 3 लाख तक।
क्यों चांदी में ज्यादा रिटर्न की उम्मीद?
विशेषज्ञों के मुताबिक, चांदी का डुअल रोल (इन्वेस्टमेंट + इंडस्ट्रियल) इसे फायदा देगा। गोल्ड-सिल्वर रेशियो अभी ऊंचा है, जिससे चांदी में ‘कैच-अप’ रैली की गुंजाइश है। हालांकि चांदी ज्यादा वोलेटाइल है—तेज उछाल के साथ गिरावट का भी रिस्क। सोना ज्यादा स्थिर और सेफ हेवन माना जाता है, खासकर मंदी या क्राइसिस में।
भारतीय एक्सपर्ट जैसे अनुज गुप्ता और सुरेंद्र मेहता भी चांदी पर ज्यादा बुलिश हैं। वे कहते हैं कि इंडस्ट्रियल वैल्यू की वजह से चांदी सोने से बेहतर परफॉर्म कर सकती है। निवेश की सलाह: सोने में SIP से लंबे समय के लिए निवेश करें, जबकि चांदी में स्टैगर्ड बाइंग (कम कीमत पर खरीदारी) बेहतर। दोनों को पोर्टफोलियो में बैलेंस करके रखें।
2026 में अनिश्चितता (जियोपॉलिटिकल टेंशन, रेट कट्स) बनी रहेगी, जो दोनों को सपोर्ट देगी। लेकिन चांदी बंपर कमाई का मौका ज्यादा दे सकती है।
