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H-1B वीजा में बड़ा बदलाव: लॉटरी सिस्टम खत्म, अब हाई सैलरी वालों को मिलेगी प्राथमिकता?

H-1B वीजा में बड़ा बदलाव: लॉटरी सिस्टम खत्म, अब हाई सैलरी वालों को मिलेगी प्राथमिकता?

नई दिल्ली: अमेरिका में H-1B वीजा प्रोग्राम में बड़ा बदलाव आने वाला है। ट्रंप प्रशासन ने रैंडम लॉटरी सिस्टम को खत्म कर दिया है और अब एक नई वेटेड सिलेक्शन प्रक्रिया लागू की जा रही है, जिसमें हाई स्किल्ड और हाई सैलरी वाले अप्लिकेंट्स को ज्यादा चांस मिलेगा। यह नियम 27 फरवरी 2026 से प्रभावी होगा और FY 2027 (मार्च 2026 में रजिस्ट्रेशन) से लागू होगा।

पहले की रैंडम लॉटरी में हर रजिस्ट्रेशन को बराबर मौका मिलता था, लेकिन अब सिलेक्शन वेज लेवल पर आधारित होगा। अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ लेबर के OEWS (Occupational Employment and Wage Statistics) के अनुसार चार वेज लेवल हैं:

लेवल 1 (एंट्री लेवल): कम चांस

लेवल 2 और 3: मध्यम

लेवल 4 (हाईएस्ट): सबसे ज्यादा वेटेज (करीब 4 गुना ज्यादा चांस)

इससे हाई सैलरी ऑफर करने वाले कैंडिडेट्स (जैसे सीनियर रोल्स या हाई कॉस्ट एरिया में) को फायदा होगा। USCIS का कहना है कि यह बदलाव अमेरिकी वर्कर्स की सैलरी और जॉब्स को प्रोटेक्ट करेगा, क्योंकि पुरानी लॉटरी में लो वेज वाले अप्लिकेंट्स का दुरुपयोग हो रहा था।

क्या सिर्फ मोटी सैलरी वालों को ही मिलेगा वीजा?

नहीं पूरी तरह। लो वेज लेवल वाले अप्लिकेंट्स को भी मौका मिलेगा, लेकिन उनका सिलेक्शन प्रॉबेबिलिटी बहुत कम हो जाएगी। एंट्री-लेवल जॉब्स, छोटी कंपनियां या लो कॉस्ट एरिया वाले कैंडिडेट्स (खासकर नए ग्रेजुएट्स) को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। भारतीय IT प्रोफेशनल्स, जो H-1B के बड़े हिस्से हैं, प्रभावित होंगे क्योंकि कई एंट्री या मिड-लेवल रोल्स में आते हैं।

इसके अलावा, सितंबर 2025 में एक प्रेसिडेंशियल प्रोक्लेमेशन से नई H-1B पिटिशन्स पर $100,000 अतिरिक्त फीस भी लगी है, जो कोर्ट में चैलेंज हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव बड़े टेक कंपनियों (जैसे गूगल, अमेजन) को फायदा देगा, जो हाई सैलरी ऑफर कर सकती हैं, जबकि स्टार्टअप्स और छोटे एम्प्लॉयर्स को दिक्कत होगी। भारतीय अप्लिकेंट्स के लिए अब हाई सैलरी वाली जॉब्स पर फोकस करना जरूरी हो जाएगा। क्या यह अमेरिकी इकोनॉमी के लिए अच्छा है या इनोवेशन को प्रभावित करेगा—यह बहस जारी है।

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