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क्रिसमस के लिए नहीं बना था ‘जिंगल बेल्स’ गाना, जानें इसका असली इतिहास और कैसे बना इतना फेमस

क्रिसमस के लिए नहीं बना था ‘जिंगल बेल्स’ गाना, जानें इसका असली इतिहास और कैसे बना इतना फेमस

क्रिसमस आते ही हर तरफ ‘जिंगल बेल्स, जिंगल बेल्स…’ की धुन गूंजने लगती है। यह गाना आज क्रिसमस का सबसे लोकप्रिय प्रतीक बन चुका है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि यह गाना मूल रूप से क्रिसमस के लिए नहीं लिखा गया था। इसमें क्रिसमस, सैंटा क्लॉज या किसी त्योहार का कोई जिक्र तक नहीं है!

गाने का असली नाम और रचयिता

इस गाने को अमेरिकी संगीतकार जेम्स लॉर्ड पियरपॉन्ट (James Lord Pierpont) ने लिखा था। मूल नाम था “द वन हॉर्स ओपन स्ले” (The One Horse Open Sleigh), जिसका मतलब है “एक घोड़े वाली खुली स्ले (बर्फ की गाड़ी) में सवारी”। इसे पहली बार 1857 में प्रकाशित किया गया। 1859 में इसे “जिंगल बेल्स” नाम से दोबारा जारी किया गया।

यह गाना 19वीं सदी की सर्दियों में लोकप्रिय स्ले रेस (बर्फ पर घोड़े वाली गाड़ी की रेस) से प्रेरित था। उस समय युवा लोग बर्फ पर तेज रफ्तार से स्ले दौड़ाते थे, हंसते-गाते थे और दुर्घटनाएं भी होती थीं – ठीक वैसे ही जैसे गाने में वर्णन है (स्ले पलट जाना आदि)।

‘जिंगल बेल’ का मतलब क्या है?

‘जिंगल बेल्स’ का मतलब है घोड़ों की जीन (हार्नेस) पर बंधी छोटी-छोटी घंटियां, जो चलते समय ‘रुन-झुन’ की आवाज करती थीं। ये घंटियां स्ले की आवाज सुनाकर दूसरों को चेतावनी देती थीं और मस्ती का माहौल बनाती थीं। गाने में “Bells on bob-tail ring” का जिक्र इसी का है।

कैसे बना इतना फेमस और क्रिसमस से जुड़ा?

शुरू में यह सिर्फ एक मजेदार सर्दी का गाना था, जो मिन्स्ट्रेल शो (एक तरह के मनोरंजन कार्यक्रम) में गाया जाता था।

1860-70 के दशक में यह सर्दियों और क्रिसमस से जुड़ने लगा, क्योंकि उस समय क्रिसमस की छवि बर्फीली सवारी से जुड़ी थी।

1898 में पहली बार रिकॉर्डिंग हुई, और 20वीं सदी की शुरुआत में बिंग क्रॉस्बी जैसे कलाकारों ने इसे क्रिसमस गाना बना दिया।

मजेदार बात: 1965 में यह अंतरिक्ष से बजाया जाने वाला पहला गाना बना, जब जेमिनी-6 मिशन के अंतरिक्ष यात्री ने हारमोनिका और असली घंटियों पर इसे बजाया!

आज भले ही यह क्रिसमस का एंथम लगता हो, लेकिन इसका असली जादू सर्दियों की मस्ती और घंटियों की रुनझुन में छिपा है। मेरी क्रिसमस!

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