गगनयान मिशन: अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए ड्रोग पैराशूट परीक्षण सफल
गगनयान मिशन: अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी के लिए ड्रोग पैराशूट परीक्षण सफल
बेंगलुरु, 21 दिसंबर 2025: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ की दिशा में एक और बड़ी सफलता हासिल की है। इसरो ने गगनयान क्रू मॉड्यूल के डीसेलेरेशन सिस्टम के लिए ड्रोग पैराशूट के क्वालिफिकेशन परीक्षणों की श्रृंखला को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ये परीक्षण 18 और 19 दिसंबर 2025 को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लैबोरेटरी (टीबीआरएल) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (आरटीआरएस) सुविधा पर आयोजित किए गए थे।
ड्रोग पैराशूट गगनयान मिशन में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटते समय क्रू मॉड्यूल की उच्च गति को नियंत्रित करने और उसे स्थिर रखने का काम ये पैराशूट करते हैं। गगनयान क्रू मॉड्यूल के डीसेलेरेशन सिस्टम में कुल 10 पैराशूट हैं, जो चार अलग-अलग प्रकार के हैं। अवरोहण क्रम की शुरुआत दो एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट से होती है, जो पैराशूट कंपार्टमेंट का सुरक्षात्मक कवर हटाते हैं। इसके बाद दो ड्रोग पैराशूट तैनात होते हैं, जो मॉड्यूल को स्थिर कर उसकी गति को काफी कम कर देते हैं। ड्रोग पैराशूट रिलीज होने पर तीन पायलट पैराशूट सक्रिय होते हैं, जो तीन मुख्य पैराशूट को निकालते हैं और अंत में क्रू मॉड्यूल को सुरक्षित स्पीड पर समुद्र में उतारते हैं।
इस परीक्षण श्रृंखला का मुख्य उद्देश्य चरम और बदलती हुई उड़ान स्थितियों में ड्रोग पैराशूट के प्रदर्शन तथा विश्वसनीयता की कठोर जांच करना था। इसरो के अनुसार, दोनों परीक्षणों ने सभी निर्धारित लक्ष्यों को हासिल किया और विषम परिस्थितियों में भी पैराशूट की मजबूती साबित हुई। इस सफलता में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी), एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एडीआरडीई) और टीबीआरएल का सक्रिय योगदान रहा।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की ओर एक और महत्वपूर्ण कदम है। गगनयान मिशन तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की कक्षा में तीन दिनों के लिए भेजेगा और उन्हें सुरक्षित वापस लाएगा। इस सफल परीक्षण से पैराशूट सिस्टम की मानव उड़ान के लिए योग्यता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा प्रगति हुई है। इसरो अब मिशन के अन्य चरणों, जैसे अनमैन्ड टेस्ट फ्लाइट्स, पर फोकस कर रहा है, जो 2026 में होने की उम्मीद है।
यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की सूची में मजबूत करती है जो स्वतंत्र रूप से मानव को अंतरिक्ष में भेज सकते हैं।
