लाल किला ब्लास्ट मामले में NIA को बड़ी कामयाबी: फरार डॉक्टर मुजफ्फर अहमद राथर को कोर्ट ने घोषित किया भगोड़ा अपराधी
लाल किला ब्लास्ट मामले में NIA को बड़ी कामयाबी: फरार डॉक्टर मुजफ्फर अहमद राथर को कोर्ट ने घोषित किया भगोड़ा अपराधी
श्रीनगर/नई दिल्ली, 13 दिसंबर 2025: दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए घातक कार ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को बड़ा झटका देते हुए फरार मुख्य आरोपी डॉक्टर मुजफ्फर अहमद राथर को श्रीनगर की विशेष NIA कोर्ट ने भगोड़ा अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित कर दिया है। कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 84 के तहत यह आदेश जारी किया।
डॉ. मुजफ्फर अहमद राथर, जो दक्षिण कश्मीर के काजीगुंड का रहने वाला है और बाल रोग विशेषज्ञ है, इस मामले में ‘व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल’ का प्रमुख सदस्य बताया जा रहा है। वह गिरफ्तार डॉ. अदील अहमद राथर का बड़ा भाई है। जांच में पता चला है कि मुजफ्फर ने आतंकी साजिश के लिए फंडिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और करीब 6 लाख रुपये का योगदान दिया। वह अफगानिस्तान भाग चुका है और वहां छिपा होने की आशंका है।
कोर्ट के आदेश के अनुसार, स्पेशल जज ने प्रोक्लेमेशन नोटिस जारी किया, जिसे शनिवार को मुजफ्फर के घर पर चिपकाया गया। आदेश में कहा गया है कि आरोपी को 28 जनवरी 2026 को सुबह 10 बजे कोर्ट में पेश होकर शिकायत का जवाब देना होगा। यदि वह ऐसा नहीं करता, तो उसकी संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई हो सकती है।
यह ब्लास्ट जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मॉड्यूल की साजिश का हिस्सा था, जिसमें सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर उन नबी ने विस्फोटकों से लदी कार को उड़ाया था। इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई और 20 से अधिक घायल हुए। NIA ने अब तक कई डॉक्टरों और सहयोगियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें डॉ. मुजम्मिल गनई, डॉ. शाहीन सईद और डॉ. अदील राथर शामिल हैं।
जांच एजेंसी का मानना है कि मुजफ्फर विदेशी हैंडलर्स से संपर्क में था और आतंकी गतिविधियों की तकनीकी जानकारी साझा करने में सक्रिय था। सरकार ने उसके खिलाफ इंटरपोल नोटिस जारी करने की प्रक्रिया भी शुरू की है। यह कदम मामले की जांच को और तेज करेगा और अन्य फरार आरोपियों पर शिकंजा कसेगा।
