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‘पीरियड्स न आने की बात छिपाना मानसिक क्रूरता’: छत्तीसगढ़ HC ने पत्नी की अपील खारिज कर दी, तलाक को दी मंजूरी!

‘पीरियड्स न आने की बात छिपाना मानसिक क्रूरता’: छत्तीसगढ़ HC ने पत्नी की अपील खारिज कर दी, तलाक को दी मंजूरी!

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक सनसनीखेज फैसले में पत्नी की तलाक के खिलाफ अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने माना कि पत्नी ने शादी से पहले अपनी मासिक धर्म न आने (एमेनोरिया) की बीमारी छिपाई, जो पति के साथ मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आती है। जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट के तलाक के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि दंपति के बीच रिश्ता सुधारना अब संभव नहीं, और वैवाहिक दायित्व न निभाना भी क्रूरता है।

मामला बिलासपुर जिले का है। पति ने 2023 में फैमिली कोर्ट में तलाक की याचिका दायर की थी। उसके अनुसार, शादी के बाद एक दिन पत्नी ने बताया कि पिछले 10 साल से उसके पीरियड्स नहीं आ रहे। डॉक्टरों की जांच में गर्भधारण में गंभीर समस्या सामने आई। पति का आरोप था कि पत्नी और उसके परिवार ने यह जानकारी जानबूझकर छिपाई, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गया। फैमिली कोर्ट ने आरोपों को सही मानते हुए तलाक मंजूर कर लिया। पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील की, लेकिन बेंच ने इसे खारिज करते हुए कहा, “बीमारी छिपाना और वैवाहिक जीवन को प्रभावित करना क्रूरता का रूप है।”

हाईकोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया कि शादी में पारदर्शिता जरूरी है। एमेनोरिया जैसी स्थिति से बच्चे न होने का भय पति के लिए मानसिक आघात था। बेंच ने कहा, “दंपति के बीच विश्वास टूट चुका है, रिश्ता अब बोझ बन गया।” यह फैसला हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13(1)(ia) के तहत आता है, जहां मानसिक क्रूरता तलाक का आधार है।

यह मामला वैवाहिक विवादों में स्वास्थ्य संबंधी खुलासे की महत्ता को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे केस बढ़ रहे हैं, जहां छिपी बीमारियां तलाक का कारण बन रही हैं। पत्नी के वकील ने फैसले पर निराशा जताई, लेकिन पति ने इसे न्यायपूर्ण बताया।

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