उत्तराखंड

नशा मुक्त अभियान पर सवाल: हर की पौड़ी पर खुलेआम शराब की बिक्री, निगरानी तंत्र फेल? हरिद्वार में बढ़ रही शिकायतें

नशा मुक्त अभियान पर सवाल: हर की पौड़ी पर खुलेआम शराब की बिक्री, निगरानी तंत्र फेल? हरिद्वार में बढ़ रही शिकायतें

उत्तराखंड सरकार का ‘नशा मुक्त देवभूमि 2025’ अभियान धरातल पर उतरने के बावजूद हरिद्वार के पवित्र घाट हर की पौड़ी पर खुलेआम शराब की बिक्री और सेवन की शिकायतें बढ़ रही हैं। तीर्थनगरी की आध्यात्मिक छवि को धक्का लगाने वाली यह स्थिति निगरानी तंत्र की नाकामी को उजागर कर रही है। स्थानीय निवासियों और पर्यटकों का कहना है कि गंगा के तट पर अवैध ठेकों और स्मगलर्स की सक्रियता से अभियान विफल साबित हो रहा है। पुलिस ने हाल ही में कार्रवाई शुरू की है, लेकिन जमीनी स्तर पर सख्ती की कमी से सवाल उठने लगे हैं।

हर की पौड़ी, जो गंगा का प्रमुख घाट है और कुंभ मेले का केंद्र, धार्मिक पर्यटन का प्रतीक है। यहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु स्नान करने आते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में शराब की अवैध बिक्री आम हो गई है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “दिन में तो गंगा आरती का नजारा होता है, लेकिन शाम ढलते ही पास के इलाकों में शराब के ठेके चहल-पहल से भर जाते हैं। पर्यटक और युवा खुलेआम पीते नजर आते हैं, जबकि नशा मुक्त अभियान का दावा किया जा रहा है।”

उत्तराखंड सरकार ने 2025 को ‘नशा मुक्त देवभूमि’ घोषित किया है, जिसके तहत राज्य भर में जागरूकता रैलियां, स्कूलों में काउंसलिंग और पुलिस चेकिंग अभियान चलाए जा रहे हैं। हरिद्वार एसएसपी परमिंदर सिंह डोभाल ने जून 2025 में बाइक रैली निकालकर नशा मुक्ति का संदेश दिया था। नवंबर में पथरी थाने ने नशा मुक्त अभियान के तहत गंगाराम नामक तस्कर को 20 लीटर कच्ची शराब के साथ गिरफ्तार किया। लेकिन QRT रिपोर्ट्स के अनुसार, रिंग रोड, मोथरावाला और चुक्खूवाला जैसे इलाकों में बिना मंजूरी के अवैध बिक्री जारी है। राज्य में शराब पर 100% टैक्स लगाने के बावजूद स्मगलिंग से समस्या बरकरार है।

विपक्षी नेता ने कहा, “अभियान सिर्फ कागजों पर है। हर की पौड़ी जैसे संवेदनशील स्थानों पर CCTV और पेट्रोलिंग बढ़ानी चाहिए।” पर्यटन विभाग ने भी चिंता जताई कि इससे तीर्थयात्रियों का विश्वास कम हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि नशा मुक्त भारत अभियान (NAPDDR) के तहत डेटा-संचालित नीतियां जरूरी हैं, जहां 16 करोड़ शराब उपभोक्ताओं में उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा है। सरकार ने 222 जिलों में विशेष कार्य शुरू किए हैं, लेकिन हरिद्वार में जमीनी अमल की कमी साफ दिख रही है।

क्या यह अभियान वाकई सफल होगा? स्थानीय प्रशासन ने वादा किया है कि दिसंबर में विशेष ड्राइव चलाई जाएगी। लेकिन तब तक गंगा तट पर नशे का साया बना रहेगा। क्या आपने भी ऐसी शिकायत देखी? कमेंट्स में शेयर करें!

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