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पुतिन को मोदी का सांस्कृतिक तोहफा: चांदी का घोड़ा, मार्बल शतरंज और भगवद्गीता—6 अनमोल उपहारों से मजबूत हुई भारत-रूस दोस्ती

पुतिन को मोदी का सांस्कृतिक तोहफा: चांदी का घोड़ा, मार्बल शतरंज और भगवद्गीता—6 अनमोल उपहारों से मजबूत हुई भारत-रूस दोस्ती

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांस्कृतिक और पारंपरिक तोहफों से दोनों देशों की सदियों पुरानी दोस्ती को नई जान फूंकी। हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता के बाद मोदी ने पुतिन को 6 अनमोल उपहार भेंट किए, जो भारतीय शिल्पकला, आध्यात्मिकता और कूटनीतिक संदेशों से भरपूर हैं। इनमें चांदी का घोड़ा, मार्बल से बनी शतरंज की सेट जैसी चीजें शामिल हैं, जो रूस के साथ साझा सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं। पुतिन ने भी मोदी को एक दुर्लभ रूसी चाय सेट भेंट किया।

ये तोहफे 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन का हिस्सा हैं, जहां 16 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि ये उपहार ‘सॉफ्ट डिप्लोमेसी’ का बेहतरीन उदाहरण हैं, जो आर्थिक और रक्षा सहयोग के अलावा सांस्कृतिक पुल बनाते हैं। आइए जानें इन 6 तोहफों की खासियत:

भगवद्गीता की रूसी अनुवादित प्रति: मोदी ने पुतिन को श्रीमद्भगवद्गीता की रूसी भाषा में अनुवादित प्रति भेंट की। पीएम ने कहा, “गीता की शिक्षाएं दुनिया भर के करोड़ों लोगों को प्रेरित करती हैं।” यह उपहार आध्यात्मिक एकता का प्रतीक है, क्योंकि गीता रूस में भी लोकप्रिय है।

चांदी का घोड़ा: राजस्थानी शिल्पकारों द्वारा तैयार चांदी का यह घोड़ा युद्ध और शक्ति का प्रतीक है। इसमें नक्काशीदार डिजाइन और रूसी शैली के तत्व जोड़े गए हैं, जो पुतिन की घुड़सवारी रुचि को ध्यान में रखकर चुना गया। मूल्य: करीब 5 लाख रुपये।

मार्बल से बनी शतरंज की सेट: मकराना मार्बल से तराशी गई यह शतरंज बोर्ड भारतीय-रूसी दोस्ती का प्रतीक है। रूस में शतरंज का जुनून देखते हुए यह उपहार रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है। बोर्ड पर हाथ से उकेरी गई नक्काशी इसे अनोखा बनाती है।

असम की प्रीमियम ब्लैक टी: ब्रह्मपुत्र घाटी की उपज वाली यह GI टैग वाली चाय माल्टी फ्लेवर और चमकदार रंग के लिए मशहूर है। पुतिन, जो चाय प्रेमी हैं, को यह तोहफा स्वास्थ्य और ताजगी का संदेश देता है। पैकेजिंग में भारतीय पैटर्न वाली डिजाइन है।

कश्मीरी पश्मीना शॉल: हथकरघा से बुनी यह शॉल कश्मीर की पारंपरिक कला का नमूना है। ठंडे रूसी मौसम को ध्यान में रखकर चुनी गई, यह गर्माहट और सौंदर्य का प्रतीक है। रंग: गहरा नीला, रूसी झंडे से प्रेरित।

हाथ से बनी तंजौर चित्रकला: तंजौर शैली की यह पेंटिंग रामायण पर आधारित है, जो रूस में लोकप्रिय है। सोने-चांदी की पच्चीकारी से सजी यह कृति सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक है।

ये तोहफे मोदी की ‘गिफ्ट डिप्लोमेसी’ का हिस्सा हैं, जो पिछले दौरों में भी पुतिन को भारतीय संस्कृति से जोड़ते रहे हैं। 2024 मॉस्को यात्रा में मोदी को रूसी चाय मिली थी, तो अब बदले में ये। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायस्वाल ने कहा, “ये उपहार हमारी साझा विरासत को मजबूत करते हैं।” पुतिन ने तोहफों की सराहना करते हुए कहा, “ये भारत की समृद्ध संस्कृति का प्रमाण हैं।” यात्रा के अंत में दोनों ने गीता की प्रति का आदान-प्रदान किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह न केवल कूटनीतिक, बल्कि भावनात्मक बंधन को गहरा करता है।

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