पुतिन के भारत दौरे में डिफेंस डील्स पर सन्नाटा: अमेरिकी दबाव और यूक्रेन युद्ध की छाया, एक्सपर्ट ने बताए 3 प्रमुख कारण
पुतिन के भारत दौरे में डिफेंस डील्स पर सन्नाटा: अमेरिकी दबाव और यूक्रेन युद्ध की छाया, एक्सपर्ट ने बताए 3 प्रमुख कारण
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा का समापन आज संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ हुआ, लेकिन रक्षा सौदों पर कोई ठोस ऐलान न होने से सियासी हलचल तेज हो गई। 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन में 16 समझौते हुए—जिनमें ऊर्जा, व्यापार, स्वास्थ्य, शिक्षा और मुफ्त ई-टूरिस्ट वीजा शामिल हैं—लेकिन S-400, Su-57 फाइटर जेट या ब्रह्मोस जैसे डिफेंस डील्स का नामोनिशान नहीं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह भारत की ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन अमेरिकी दबाव ने इसे प्रभावित किया।
अटलांटिक काउंसिल के साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के डिप्टी डायरेक्टर माइकल कुगेलमैन ने कहा, “पुतिन की यात्रा में डिफेंस डील्स न होने का मुख्य कारण यूक्रेन युद्ध के बाद रूस की सप्लाई चेन में देरी है। 2022 से कोई बड़ा सौदा नहीं हुआ, क्योंकि मॉस्को अपनी जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है।” कुगेलमैन ने बताया कि भारत ने Su-57 खरीदने की चर्चा की, लेकिन डिलीवरी में 2-3 साल की देरी और चाइनीज कंपोनेंट्स की चिंता ने रोक दिया। उन्होंने जोड़ा, “भारत अब हथियारों को डाइवर्सिफाई कर रहा है—फ्रांस, इजरायल और अमेरिका से सौदे बढ़े हैं। रूस पर निर्भरता 50% से घटकर 36% हो गई।”
दूसरा बड़ा कारण अमेरिकी दबाव है। ट्रंप प्रशासन ने अगस्त 2025 में रूसी तेल खरीद पर भारत पर 50% टैरिफ लगाए, जिसके बाद नई दिल्ली सतर्क हो गई। चैथम हाउस के सीनियर रिसर्च फेलो राजा मोहन ने कहा, “भारत US-India FTA और EU-FTA फाइनलाइज करने की कगार पर है। पुतिन के दौरे में बड़ा डिफेंस ऐलान इन डील्स को पटरी से उतार सकता था।” काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अनुराग दोंठी ने अल जजीरा को बताया, “भारत रूस के साथ डील्स करेगा, लेकिन अमेरिकी आलोचना को ब्लंट करने के लिए समानांतर US डील्स पर फोकस कर रहा है। CAATSA सैंक्शंस का डर बरकरार है।”
तीसरा, यात्रा का फोकस आर्थिक विविधीकरण पर था। रॉयटर्स के अनुसार, व्यापार $64 बिलियन पहुंचा, लेकिन तेल पर निर्भरता कम करने के लिए फार्मा, IT और लेबर मोबिलिटी पर जोर। कुगेलमैन ने कहा, “यह ‘लो-हैंगिंग फ्रूट’ डील्स थे। डिफेंस जैसे हाई-प्रोफाइल मुद्दे बाद के दौरों के लिए बचे।” X पर यूजर्स ने इसे ‘सिंबॉलिक विजिट’ बताया, जहां एक पोस्ट में लिखा, “ट्रेड बूस्ट तो हुआ, लेकिन डिफेंस में कुछ बड़ा मिसिंग।”
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि जनवरी 2026 तक Su-30 अपग्रेड या S-500 पर बात आगे बढ़ सकती है, लेकिन भारत की ‘मल्टी-अलाइनमेंट’ पॉलिसी डिफेंस को बैलेंस्ड रखेगी। यह यात्रा भारत-रूस दोस्ती को मजबूत तो करती है, लेकिन वैश्विक दबावों के बीच सतर्क कदमों का प्रतीक बनी।
