पुतिन के राजकीय भोज में कांग्रेस का ‘सिर्फ एक चेहरा’: न खड़गे-न राहुल, शशि थरूर को मिला न्योता—विपक्ष में मचा बवाल
पुतिन के राजकीय भोज में कांग्रेस का ‘सिर्फ एक चेहरा’: न खड़गे-न राहुल, शशि थरूर को मिला न्योता—विपक्ष में मचा बवाल
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दूसरे और आखिरी दिन राष्ट्रपति भवन में आयोजित राजकीय भोज ने राजनीतिक हलचल मचा दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मेजबानी में होने वाले इस भोज में विपक्षी दलों के प्रमुख चेहरों—कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी—को न्योता न देने पर सवाल उठे हैं। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद शशि थरूर को आमंत्रित किया गया है, जो पुतिन के सम्मान में शाम को होने वाले इस कार्यक्रम में शामिल होंगे।
सूत्रों के मुताबिक, भोज के लिए राजनीति, व्यापार, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों से प्रमुख हस्तियों को निमंत्रण भेजा गया था। लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को दरकिनार करने से पार्टी में नाराजगी है। एक वरिष्ठ कांग्रेसी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “यह प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। लोकतंत्र में विपक्ष को ऐसी महत्वपूर्ण कूटनीतिक आयोजनों में शामिल होना चाहिए।” थरूर ने खुद इस पर सफाई दी, “मुझे विदेश मामलों की संसदीय समिति के चेयरमैन के नाते न्योता मिला है। यह मेरा फर्ज है, इसलिए मैं जाऊंगा। लेकिन अपोजिशन के किसी भी विजिटर को न बुलाना दुर्भाग्यपूर्ण है। फॉरेन पॉलिसी में सबको एकजुट होना चाहिए।”
पुतिन का यह दौरा 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन का हिस्सा है, जहां सुबह राष्ट्रपति भवन में गार्ड ऑफ ऑनर के बाद मोदी-पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों ने 16 समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिनमें मुफ्त ई-टूरिस्ट वीजा, स्वास्थ्य, शिक्षा और उर्वरक क्षेत्र शामिल हैं। राजघाट पर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद पुतिन का शाम का शेड्यूल भोज पर केंद्रित है। थरूर का न्योता उनके रूस-भारत संबंधों पर विशेषज्ञता को देखते हुए दिया गया माना जा रहा है। उन्होंने पहले भी पुतिन की यात्रा को “बेहद महत्वपूर्ण” बताया था।
कांग्रेस के अन्य नेताओं जैसे विवेक तंखा ने भी प्रोटोकॉल पर सवाल उठाए, “पहले हमेशा LoP को बुलाया जाता था। क्या सरकार को डर है कि राहुल गांधी कुछ कह देंगे?” एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि राहुल को न्योता मिला था, लेकिन आधिकारिक सूत्रों ने इसे खारिज कर दिया। यह विवाद भारत-रूस की मजबूत साझेदारी के बीच विपक्ष और सत्ता के बीच की खाई को उजागर करता है। पुतिन रात 9 बजे मॉस्को लौटेंगे, लेकिन यह मुद्दा कांग्रेस की आंतरिक चर्चा को हवा दे सकता है। क्या थरूर का जाना पार्टी के लिए राहत बनेगा या नया विवाद? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कूटनीति में विपक्ष की भूमिका पर बहस छेड़ देगा।
