हानिकारक आदतों पर लगाम: लोकसभा ने पास किया ‘हेल्थ सिक्योरिटी टू नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल’, पान-मसाला-सिगरेट पर नया टैक्स—रक्षा-स्वास्थ्य को मिलेगी मजबूती
हानिकारक आदतों पर लगाम: लोकसभा ने पास किया ‘हेल्थ सिक्योरिटी टू नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल’, पान-मसाला-सिगरेट पर नया टैक्स—रक्षा-स्वास्थ्य को मिलेगी मजबूती
लोकसभा ने शुक्रवार को ‘द हेल्थ सिक्योरिटी टू नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025’ को ध्वनिमत से पारित कर दिया, जिसके तहत पान मसाला, सिगरेट जैसे हानिकारक उत्पादों पर उत्पादन-आधारित अतिरिक्त सेस लगेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने बहस का जवाब देते हुए कहा कि यह कदम ‘सिन गुड्स’ (हानिकारक वस्तुओं) से राजस्व जुटाकर स्वास्थ्य सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा। जीएसटी मुआवजा सेस समाप्त होने के बाद यह नया सेस 40% तक लगेगा, जो राज्यों के साथ साझा होगा।
बिल 1 दिसंबर को पेश किया गया था और गुरुवार को बहस हुई। सीतारामन ने स्पष्ट किया कि सिगरेट पर पहले से 40% से ज्यादा एक्साइज ड्यूटी है, जो राज्यों के साथ बांटी जाएगी। लेकिन पान मसाला जीएसटी के तहत उपभोग-आधारित 28% टैक्स पर है, जो कई श्रेणियों को छूट दे देता है। इसलिए उत्पादन क्षमता पर सेस लगाया जा रहा है—मशीनों की स्थापना या प्रक्रिया पर। पान मसाला की पाउच (2.5 ग्राम से 10 ग्राम) के आधार पर मासिक सेस ₹101 लाख से ₹2.5 करोड़ तक होगा। उल्लंघन पर 5 साल की सजा का प्रावधान है।
विपक्ष ने तीखी आलोचना की। एनसीपी-एसपी की सुप्रिया सुले ने पूछा कि सेस क्यों, टैक्स क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि दरें दोगुनी करने का प्रावधान संसद की भूमिका कमजोर करता है। टीएमसी के सौगाता रॉय ने राज्यों को हिस्सेदारी न देने का मुद्दा उठाया, जबकि अन्य सदस्यों ने गुटखा-पान मसाला पर बैन की विफलता का जिक्र किया। सीतारामन ने जवाब दिया कि यह ‘डेमेरिट गुड्स’ पर सीमित है, आवश्यक वस्तुओं पर नहीं। राजस्व स्वास्थ्य योजनाओं और रक्षा पर खर्च होगा—2014-25 में सेस से ₹6.49 लाख करोड़ जुटे, लेकिन अब पारदर्शिता बढ़ेगी।
ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (जीएटीएस-2) के अनुसार, भारत में 42% पुरुष और 14% महिलाएं तंबाकू इस्तेमाल करती हैं, जो विश्व के 70% स्मोकलेस टोबैको यूजर्स का घर है। यह बिल स्वास्थ्य बोझ कम करेगा और रक्षा बजट को बूस्ट देगा। बुधवार को ही सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल पास हुआ, जो तंबाकू पर अतिरिक्त ड्यूटी लगाता है। विंटर सेशन के पांचवें दिन यह बिल पास होते ही हंगामा शांत हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम कर चोरी रोकेगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देगा। क्या राज्यसभा में भी आसानी से पास होगा? मनी बिल होने से लोकसभा की मंजूरी ही काफी है। यह कदम भारत की आर्थिक-सामाजिक सुरक्षा को नई दिशा देगा।
