हल्द्वानी रेलवे अतिक्रमण पर CM धामी का सख्त रुख: ‘देवभूमि की डेमोग्राफी किसी भी हाल में नहीं बदलने देंगे, SC आदेश के लिए तैयार’
हल्द्वानी रेलवे अतिक्रमण पर CM धामी का सख्त रुख: ‘देवभूमि की डेमोग्राफी किसी भी हाल में नहीं बदलने देंगे, SC आदेश के लिए तैयार’
नैनीताल। हल्द्वानी के बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार (3 दिसंबर 2025) को साफ संदेश दिया कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के किसी भी आदेश के लिए पूरी तरह तैयार है। नैनीताल दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में CM ने कहा, “किसी भी हाल में देवभूमि उत्तराखंड की डेमोग्राफी को बदलने नहीं दिया जाएगा।” उन्होंने घुसपैठियों के खिलाफ चल रहे अभियान को और तेज करने का ऐलान किया, ताकि स्थानीय निवासियों का हक सुरक्षित रहे।
किसी भी हाल में नहीं बदलने देंगे देवभूमि की डेमोग्राफी: CM
CM धामी ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने को प्रतिबद्ध है, लेकिन उत्तराखंड की सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय पहचान को खतरे में नहीं डालेंगे। “हम देवभूमि की पवित्रता और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे। घुसपैठ और अतिक्रमण से उत्पन्न चुनौतियों का सामना मजबूती से करेंगे,” उन्होंने कहा। यह बयान हल्द्वानी मामले के संदर्भ में आया, जहां रेलवे भूमि पर बने अवैध निर्माणों को लेकर तनाव चरम पर है। CM ने स्थानीय निवासियों में असुरक्षा की भावना न फैलने देने का भरोसा दिलाया।
घुसपैठियों के खिलाफ जारी है अभियान
मुख्यमंत्री ने घुसपैठियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग नकली सर्टिफिकेट बनाकर यहां बस गए हैं, उनके खिलाफ अभियान चल रहा है। “हमारा संकल्प है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। किसी भी हाल में उत्तराखंड के मूल निवासियों का हक नहीं मारा जाएगा।” हाल ही में राज्य सरकार ने आधार-आधारित सत्यापन अभियान तेज किया है, जिसमें 50,000 से अधिक संदिग्ध आवेदनों की जांच हो रही है। CM ने कहा कि यह कदम डेमोग्राफी को संरक्षित करने के लिए जरूरी है, और केंद्र सरकार का भी सहयोग मिल रहा है। विपक्ष ने इसे राजनीतिकरण का आरोप लगाया, लेकिन CM ने इसे “जनहित का मुद्दा” बताया।
9 दिसंबर को होगी मामले की सुनवाई
यह मामला दो दशक से अधिक पुराना है। रेलवे का दावा है कि हल्द्वानी में उनकी 29 एकड़ मूल्यवान भूमि पर 4,365 अवैध अतिक्रमण हो चुके हैं, जो बनभूलपुरा क्षेत्र में फैले हैं। 2004 से चला आ रहा यह विवाद 2024 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां डेमोलिशन के आदेश पर सवाल उठे। 2 दिसंबर को निर्धारित सुनवाई को SC ने स्थगित कर 9 दिसंबर के लिए टाल दिया। कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि अतिक्रमणकारियों में ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के हैं, और बेदखली से सामाजिक अशांति फैलेगी। राज्य सरकार ने पक्ष रखा कि यह भूमि रेलवे की है, और अतिक्रमण हटाना कानूनी बाध्यता है।
हल्द्वानी में पिछले साल फरवरी में डेमोलिशन के दौरान हुई हिंसा में 6 लोग मारे गए थे, और 100 से अधिक घायल हुए थे। उसके बाद केंद्र ने CRPF की 36 कंपनियां तैनात कीं। CM धामी ने कहा कि सरकार शांति बनाए रखने के लिए सतर्क है, लेकिन कानून का पालन सुनिश्चित करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि 9 दिसंबर का फैसला उत्तराखंड की राजनीति को प्रभावित करेगा, खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले। स्थानीय संगठनों ने CM के बयान का स्वागत किया, लेकिन मांग की कि प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास दिया जाए। क्या SC का फैसला विवाद सुलझाएगा? इंतजार बाकी है।
